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CG News,रसोइयों की हड़ताल का बोझ शिक्षकों पर डालने का विरोध, फेडरेशन ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना को लेकर चल रही रसोइयों की हड़ताल अब शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच सीधे टकराव का कारण बन गई है। रसोइयों की अनुपस्थिति में स्कूलों में भोजन व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रशासनिक दबाव को लेकर छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

Cg news/रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पिछले 31 दिनों से जारी रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने मध्याह्न भोजन व्यवस्था को चरमरा दिया है। इस संकट के बीच, शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों पर भोजन बनवाने और व्यवस्था संभालने के लिए बनाए जा रहे दबाव ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने विभाग के इस रवैये को “तानाशाही” करार देते हुए स्पष्ट किया है कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए हैं, न कि रसोइयों की कमी पूरी करने के लिए।

फेडरेशन के प्रांतीय प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर ने कड़े शब्दों में कहा कि कई जिलों में अधिकारियों द्वारा स्कूलों के प्रधान पाठकों और शिक्षकों को धमकाया जा रहा है।

धमतरी जैसे जिलों का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि बीईओ (BEO) के माध्यम से शिक्षकों को वेतन कटौती और नोटिस का डर दिखाकर MDM संचालन के लिए मजबूर किया जा रहा है। फेडरेशन का कहना है कि शिक्षकों को अपनी जेब से मजदूर रखने के लिए कहना न केवल अनुचित है, बल्कि यह उनके मौलिक अधिकारों का भी हनन है।

शिक्षकों ने सरकार को सुझाव दिया है कि ऐसी आपात स्थिति में मध्याह्न भोजन के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी जानी चाहिए। पंचायतों के पास 15वें वित्त आयोग की राशि उपलब्ध होती है, जिससे वे अस्थायी रूप से रसोइयों की व्यवस्था कर सकते हैं।

सहायक शिक्षक फेडरेशन के अनुसार, विभाग को चाहिए कि वह पंचायतों को निर्देशित करे, न कि शिक्षकों पर आर्थिक और मानसिक बोझ डाले।

इस मुद्दे पर फेडरेशन के पदाधिकारियों—दौलत ध्रुव, ममता प्रजापति और प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने एकजुट होकर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी शिक्षक का वेतन रोका गया या विभागीय कार्रवाई की गई, तो प्रदेश भर के शिक्षक ब्लॉक स्तर पर घेराव और तालाबंदी करेंगे।

शिक्षकों का कहना है कि वे समस्या का समाधान चाहते हैं, लेकिन प्रशासनिक धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के लगभग 87 हजार रसोइए 29 दिसंबर 2025 से अपनी मांगों को लेकर नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर डटे हुए हैं। उनकी प्रमुख मांगें  हैं जिसमें दैनिक मजदूरी ₹66 से बढ़ाकर ₹400 से अधिक की जाए।रसोइयों को ‘अंशकालीन’ से बदलकर ‘पूर्णकालीन’ कर्मचारी घोषित किया जाए।छात्र संख्या कम होने के आधार पर छंटनी बंद हो।

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