कानून नहीं, डीजे का राज; आदेश फाइलों में, शोर सड़कों पर
रामानुजगंज में नियमों की मौत, डीजे की तानाशाही जिंदा

रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)..नगर पालिका क्षेत्र रामानुजगंज में कानून व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने डीजे संचालक खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और तेज़, जानलेवा ध्वनि से आम नागरिकों की सेहत और शांति दोनों पर सीधा हमला हो रहा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि नियम कागज़ों में हैं और सड़कों पर शोर का कानून चल रहा है।
मूर्ति विसर्जन से लेकर शादी-विवाह और अन्य आयोजनों तक डीजे का बेकाबू संचालन आम बात हो गई है। तेज कंपन वाले साउंड से बुजुर्ग, महिलाएं, हार्ट पेशेंट और छोटे बच्चे रोज़ परेशान हैं। शिकायतें बढ़ रही हैं, लेकिन कार्रवाई नदारद है। जनता का कहना है कि उत्सव में संगीत जरूरी है, मगर ऐसा संगीत किस काम का जो किसी की जान पर बन आए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीजे संचालन से जुड़े हादसों के बावजूद प्रशासन ने अब तक ठोस पहल नहीं की। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि तेज़ और प्रतिबंधित डीजे पर सख्ती हो, फिर भी जमीनी हकीकत इसके उलट है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा कलेक्टर और एसपी को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बाद भी रामानुजगंज में डीजे संचालकों का तानाशाही रवैया जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियम इतने स्पष्ट हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। क्या डीजे संचालक प्रशासन से ऊपर हो चुके हैं या फिर मौन सहमति के सहारे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। यही वजह है कि हर आयोजन के साथ नागरिकों का गुस्सा और बेचैनी बढ़ती जा रही है।
इस पूरे मामले में जब एसडीएम आनंद नेताम से दूरभाष पर बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि डीजे संचालन के लिए उनके कार्यालय से किसी भी तरह की अनुमति जारी नहीं की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बिना अनुमति डीजे चलाया जा रहा है तो पुलिस विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए और उन्होंने तत्काल रामानुजगंज थाना प्रभारी को निर्देश देने की बात कही।
अब सवाल प्रशासन के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच का है। अगर अनुमति नहीं दी गई, तो डीजे कैसे और किसके संरक्षण में चल रहे हैं। रामानुजगंज की जनता जवाब चाहती है—क्या कानून सच में लागू होगा या फिर शोर के आगे व्यवस्था यूं ही दम तोड़ती रहेगी।




