पेंशन पर हाईकोर्ट पारित निर्णय शीघ्र लागू हो..एसोसिएशन देगा 27 जनवरी से चरणबद्ध ज्ञापन,संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मान्य करने आदेश जारी करने की मांग

बिलासपुर/छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि उच्च न्यायालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा WPS 647/2021 दिनांक 23/01/2026 एवं रमेश चंद्रवंशी WPS 2255/2021 एवं अन्य याचिकाओं पर पारित निर्णय के तहत पूर्व सेवा गणना करते हुए संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मान्य करने आदेश जारी करने एवं शिक्षक एल बी संवर्ग के मांगो को लेकर चरण बद्ध ज्ञापन का कार्यक्रम घोषित किया गया है, जिसके तहत-
प्रथम चरण – दिनांक 27 जनवरी से 30 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन जिला शाखा व ब्लॉक शाखा द्वारा जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, संचालक डीपीआई के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
द्वितीय चरण – दिनांक 1 फ़रवरी से 8 फरवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन प्रदेश टीम द्वारा मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री, शिक्षा सचिव, संचालक डीपीआई को ज्ञापन दिया जाएगा।एवंजिला एवं ब्लॉक शाखा द्वारा दिनांक 1 फरवरी से 8 फरवरी 2026 तक अपने क्षेत्र के माननीय सांसदों, विधायकों, एवं अन्य नेताओं को मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री , शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।
जिन मांगो को लेकर ज्ञापन दिया जाएगा वह इस प्रकार हैउच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा रमेश चंद्रवंशी एवं अन्य (WPS 2255/2021), दिलीप कुमार साहू एवं अन्य (WPS 3137/2021), रामलाल डडसेना एवं अन्य (WPS 2930/2021), गोपी वर्मा एवं अन्य (WPS 2557/2021), किशन लाल देशमुख एवं अन्य (WPS 1814/2021), गिरधर राम साहू एवं अन्य (WPS 2206/2021), मदन साटकर एवं अन्य (WPS 3850/2021), मनोहर लाल गौतम एवं अन्य (WPS 6659/2021), जोहन राम पूनाचा एवं अन्य (WPS 3835/2021) एवं अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर पेंशन संबंधी याचिकाओं पर दिनांक 23.01.2026 को निर्णय पारित किया गया है।
उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ताओं के प्रकरण में पुनर्विचार कर स्पष्ट आदेश जारी किया जाए।न्यायालय द्वारा यह महत्वपूर्ण रूप से प्रतिपादित किया गया है कि—
“It cannot be lost sight of that pension is a welfare measure and a form of deferred compensation.”अर्थात पेंशन एक कल्याणकारी योजना है तथा यह सेवाओं के बदले दिया जाने वाला स्थगित पारिश्रमिक है।
साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि—“The long years of service rendered by the petitioners prior to absorption cannot be brushed aside as irrelevant.”
अर्थात संविलियन से पूर्व याचिकाकर्ताओं द्वारा दी गई दीर्घकालीन सेवाओं को अप्रासंगिक मानकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
इसके अतिरिक्त माननीय उच्च न्यायालय ने यह निर्देश भी दिया है कि—Such reconsideration must necessarily take into account the continuity of service, nature of duties performed, source of salary, administrative control, and the constitutional mandate of equality under Articles 14 and 16 of the Constitution.
“अर्थात इस प्रकार के पुनर्विचार में सेवा की निरंतरता, किए गए कर्तव्यों की प्रकृति, वेतन का स्रोत, प्रशासनिक नियंत्रण तथा संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अंतर्गत समानता के संवैधानिक सिद्धांतों को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए।”
अतः निवेदन है कि माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर छत्तीसगढ़ द्वारा दिनांक, WPS 647/2021 दिनांक 23/01/2026 एवं रमेश चंद्रवंशी WPS 2255/2021 एवं अन्य याचिकाओं में पारित निर्णय के तहत पूर्व सेवा गणना करते हुए संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मान्य करने हेतु आदेश जारी किया जावेसाथ ही शिक्षक (एल बी) संवर्ग के प्रथम नियुक्ति तिथि से पूर्व सेवा गणना का लाभ देते हुए निम्नांकित मांगो का ज्ञापन दिया जाएगा
1. केंद्र सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार व उत्तराखंड सरकार की तरह छत्तीसगढ़ राज्य में भी पेंशन निर्धारण के लिए 33 वर्ष अर्हकारी सेवा के स्थान पर 20 वर्ष अर्हकारी सेवा होने पर 50 % पेंशन निर्धारण का प्रावधान किया जावे।
2. न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा अवधि पर पेंशन निर्धारण का प्रावधान है, इससे एल बी संवर्ग के अनेकों शिक्षक बिना पेंशन के सेवानिवृत हो रहे है, अतः न्यूनतम 5 वर्ष की सेवा अवधि पर पेंशन निर्धारण का प्रावधान किया जावे।
3. 30 हजार सहायक शिक्षक पदोन्नति एवं क्रमोन्नति से वंचित है, पदोन्नति हेतु दिए गए वन टाईम रिलेक्सेशन की तरह क्रमोन्नति के लिए 10 वर्ष की सेवा को एक बार (वन टाइम रिलेक्सेशन) के लिए शिथिल करते हुए 5 वर्ष में क्रमोन्नति का लाभ देने प्रावधान किया जावे।
4. छत्तीसगढ़ राजपत्र शिक्षक पंचायत संवर्ग भर्ती तथा सेवा की शर्ते नियम 17 अगस्त 2012 के तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किया गया है, इसके पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किया जावे साथ ही माननीय सुप्रीम कोर्ट के 1 सितम्बर 2025 को पारित निर्णय में हस्तक्षेप/पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए शिक्षा विभाग द्वारा विभागीय सीमित परीक्षा आयोजित कर सेवारत शिक्षकों के हितों की रक्षा किया जावे।
5. सहायक शिक्षक, शिक्षक जो केवल डीएड या समकक्ष योग्यता रखते हैं, उन सभी के लिए एनसीटीई के नियमानुसार कोर्स निर्धारण कर 6 माह के बीएड ‘ब्रिज कोर्स शीघ्र प्रारम्भ किया जावे।
6. स्कूलों में मोबाइल वीएसके ऐप से ऑनलाइन अटेंडेंस के स्थान पर स्कूलों में बायोमैट्रिक (पंच) मशीन से उपस्थिति लिया जावे।





