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CG News: शिक्षक LB संवर्ग की पेंशन और सेवा गणना पर हाई कोर्ट का फैसला, सरकार को नीति बनाने के निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक स्पष्ट, तर्कसंगत और समान नीति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो संविधान के समानता के सिद्धांतों पर खरी उतरे।

CG news।शिक्षक LB संवर्ग ।बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षक एलबी (LB) संवर्ग के हजारों शिक्षकों के भविष्य और उनकी पुरानी पेंशन पात्रता को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि पेंशन और वरिष्ठता के निर्धारण के लिए ‘नियुक्ति की निर्णायक तिथि’ तय करना सरकार का कार्य है, न कि न्यायालय का।

कोर्ट ने राज्य सरकार को इस संबंध में एक स्पष्ट, तर्कसंगत और समान नीति बनाने के निर्देश दिए हैं, जो संविधान के समानता के सिद्धांतों पर खरी उतरे।

यह पूरा मामला वर्ष 1998-99 से कार्यरत शिक्षाकर्मियों के संविलियन से जुड़ा है। परमेश्वर प्रसाद जायसवाल और श्यामलाल पटेल सहित 300 से अधिक शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि पेंशन के लिए उनकी सेवा की गणना प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से की जानी चाहिए।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि चूंकि राज्य सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल कर दी है, इसलिए उनकी दो दशक से अधिक की सेवाओं को नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा।

वहीं, राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि शिक्षाकर्मियों की शुरुआती नियुक्ति पंचायत विभाग के अधीन थी और स्कूल शिक्षा विभाग में उनका संविलियन 2018 में हुआ है, इसलिए दोनों सेवाएं अलग-अलग हैं।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में बड़ी बारीकी से इस संवैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया है। न्यायालय ने कहा कि जब किसी कर्मचारी की सेवा शिक्षाकर्मी से नियमित शिक्षक जैसे विभिन्न चरणों में रही हो, तो पेंशन पात्रता तब तक तय नहीं हो सकती जब तक सरकार एक ‘यूनिफॉर्म पॉलिसी’ न बना ले।

कोर्ट ने सरकार को सचेत किया कि जो भी निर्णय लिया जाए, वह मनमाना नहीं होना चाहिए और उसमें स्पष्टता होनी चाहिए कि वरिष्ठता की गणना 1998 से होगी या 2018 के संविलियन से।

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 1.60 लाख शिक्षक एलबी कार्यरत हैं। सरकार ने 1 जुलाई 2018 से संविलियन की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें पहले 8 साल और बाद में 2 साल की सेवा अवधि का मापदंड तय किया गया था। इस फैसले के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है।

यदि सरकार सेवा गणना की तिथि प्रारंभिक नियुक्ति से मानती है, तो लाखों शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ मिलेगा, लेकिन यदि संविलियन तिथि को ही आधार बनाया जाता है, तो शिक्षकों को बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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