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Madhya Pradesh

Paddy Procurement: धान खरीदी – केंद्र प्रभारियों पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, कलेक्टर से शिकायत

कुछ किसानों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर उन्हें केंद्र प्रभारियों द्वारा डराया और धमकाया भी गया। किसानों का मानना है कि धान खरीदी सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी योजना है, जिसका उद्देश्य अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का वाजिब दाम दिलाना है, लेकिन उमरिया में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत ने इस पूरी योजना की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

Paddy Procurement/उमरिया जिले में खरीफ विपणन वर्ष के तहत संचालित धान खरीदी की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई है, लेकिन इसके साथ ही जिले के विभिन्न केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की पोल खुलने लगी है। जिले में धान खरीदी के लिए कुल 44 केंद्र बनाए गए थे, जहां किसानों से उनकी उपज खरीदी जा रही थी।

अब जैसे ही खरीदी की अंतिम तिथि बीती है, जिले के दूर-दराज के इलाकों से आए किसानों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया है। किसानों का सीधा आरोप है कि धान खरीदी के दौरान कई केंद्रों पर जमकर अनियमितताएं बरती गईं और केंद्र प्रभारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया।

किसानों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, कई केंद्र प्रभारियों ने धान की तुलाई के बदले किसानों से अवैध रूप से पैसों की मांग की। किसानों का कहना है कि जो किसान पैसे देने में असमर्थ थे, उनकी उपज लेने में आनाकानी की गई या फिर उनके धान में खामियां बताकर उन्हें परेशान किया गया।

कुछ किसानों ने तो यहां तक आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार का विरोध करने पर उन्हें केंद्र प्रभारियों द्वारा डराया और धमकाया भी गया। किसानों का मानना है कि धान खरीदी सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी योजना है, जिसका उद्देश्य अन्नदाताओं को उनकी मेहनत का वाजिब दाम दिलाना है, लेकिन उमरिया में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत ने इस पूरी योजना की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने उमरिया कलेक्टर से मिलकर एक विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। इस शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि उन सभी केंद्रों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए जहां से भ्रष्टाचार की खबरें आ रही हैं। किसानों का कहना है कि केवल जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ ऐसी कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए जो भविष्य के लिए एक नजीर बने।

किसानों का तर्क है कि यदि इस बार दोषियों को छोड़ दिया गया, तो आने वाले वर्षों में भी किसानों को इसी तरह की लूट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ेगा।

प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल इस मामले में किसी बड़ी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कलेक्टर कार्यालय ने किसानों को आश्वस्त किया है कि प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एक जांच टीम गठित कर केंद्रों के रिकॉर्ड और किसानों के बयानों का मिलान किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि प्राथमिक जांच में भ्रष्टाचार या अवैध वसूली के साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित केंद्र प्रभारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, उमरिया जिले के किसान प्रशासन की अगली कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए ताकि बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका को खत्म किया जा सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो वे अपने हक की लड़ाई के लिए उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। 

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