एकल-शिक्षकीय स्कूलों पर मंडराया संकट — मंडल संयोजक की नियुक्ति पर संघ का ऐतराज..संघ ने कलेक्टर को घेरा

बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)… छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने मंडल संयोजक की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर बलरामपुर को ज्ञापन सौंपा। संघ ने मांग की है कि मंडल संयोजक का दायित्व केवल छात्रावास अधीक्षकों को ही सौंपा जाए, न कि शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को।
संघ के अध्यक्ष ने ज्ञापन में कहा कि आदिम जाति विकास मंत्रालय और उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि शैक्षणिक संवर्ग के कर्मचारियों को प्रभारी मंडल संयोजक का प्रभार न दिया जाए। इसके बावजूद आदेशों की अनदेखी करते हुए शिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
संघ का तर्क है कि शिक्षा विभाग में पहले ही बड़े पैमाने पर युक्तियुक्तकरण हुआ है, जिससे कई स्कूल एकल-शिक्षकीय स्थिति में पहुंच गए हैं। ऐसे में शिक्षकों को मंडल संयोजक बना देने से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है और छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उदाहरण के तौर पर, प्राथमिक शाला डम्हाटोली, शंकरगढ़ और रामचंद्रपुर चाकी सहित कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
संघ ने यह भी कहा कि प्रमुख सचिव और हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद अब तक शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई कि अगर किसी कर्मचारी को मंडल संयोजक का प्रभार दिया जाता है तो उसका औचित्यपूर्ण प्रस्ताव शासन को भेजा जाए और केवल अनुमोदन मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
संघ ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि वाड्रफनगर, रामचंद्रपुर, बलरामपुर, राजपुर, शंकरगढ़ और कुसमी में पदस्थ वर्तमान अधीक्षकों — महेन्द्र कुमार भानु, विकास कुमार गुप्ता, मुकेश कुमार सिंह, जय मानिकपुरी, राजेश भारद्वाज और उदेश सिंह — को ही मंडल संयोजक का दायित्व सौंपा जाए।
ज्ञापन में यह भी दोहराया गया कि उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 18 अक्टूबर 2023 को आदेश जारी कर इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद आदेश का पालन न होना गंभीर लापरवाही है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने पर विवश होंगे।





