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जियो ने लॉन्च किया एआई रेडी क्लाउड कंप्यूटर ‘जियो-पीसी’

• टीवी स्क्रीन को स्मार्ट पीसी में बदलें • खास हार्डवेयर की आवश्यकता नहीं • मंथली प्लान 400 रु से शुरू

नई दिल्ली।कंप्यूटर की चाह रखने वालों के लिए खुशखबरी, रिलायंस जियो ने नया जियो-पीसी लॉन्च किया है। यह एक क्लाउड बेस्ड वर्चुअल डेस्कटॉप प्लेटफ़ॉर्म है। जो आपके घर या दफ्तर में मौजूद टीवी स्क्रीन को पलभर में हाईएंड पर्सनल कंप्यूटरमें बदल सकता है। जिन ग्राहकों के पास जियोफाइबर या जियो एयरफाइबर के कनेक्शन हैं, उन्हें जियो-पीसी का इस्तेमाल करने के लिए मंथली प्लान लेना होगा। नए उपयोगकर्ता इस सेवा का एक महीने के लिए मुफ़्त उपयोग कर सकेंगे।

क्लाउड कंप्यूटिंग में यह देश का पहला ‘पे-एज़-यू-गो मॉडल’ है, यानी जितना इस्तेमाल करो उतना पेमेंट करो। कंपनी ने इस सेवा के लिए कोई लॉक-इन पीरियड नहीं रखा है। ग्राहक को रखरखाव का खर्च भी नहीं उठाना पड़ता। किसी महंगे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर के अपग्रेड की आवश्यकता भी नहीं होगी। बस प्लग इन करें, साइन अप करें और कंप्यूटिंग शुरू करें।

कंपनी का दावा है कि क्लाउड बेस्ड जियो-पीसी काफी ताकतवर है। इसकी प्रोसेसिंग क्षमता भी शानदार है और यह रोजमर्रा के कामकाज के साथ गेमिंग और ग्राफिक रेंडरिंग जैसे हाईएंड काम भी आसानी से संभाल सकता है। जियो-पीसी जैसी क्षमता वाला कंप्यूटरबाजार में 50 हजार रु से अधिक का मिलता है। दूसरी तरफ जियो-पीसी के प्लान 400 रु प्रतिमाह से शुरू होते हैं। यानी 400 रु प्रतिमाह चुका कर ग्राहक 50 हजार तक की एकमुश्त रकम बचा सकता है। सब्सक्रिप्शन के साथ यूजर्स को सभी प्रमुख AI टूल्स, एप्लिकेशन्स और 512 GB क्लाउड स्टोरेज भी मिलेगी।

दुनिया भर के यूजर्स के बीच मशहूर ‘अडोबी एक्सप्रेस’ को जियो-पीसी के ग्राहक मुफ्त में इस्तेमाल कर सकेंगे। ‘अडोबी एक्सप्रेस’ दरअसल एक डिज़ाइन और एडिटिंग टूल है। इसके लिए जियो-पीसी ने अडोबी कंपनी के साथ हाथ मिलाया है।

जियो-पीसी को इस्तेमाल भी काफी आसान है। ज्यादातर घरों में जियोफाइबर और जियो एयरफाइबर का सेटटॉप बॉक्स टीवी से कनेक्ट रहता है। करना बस यह है कि कीबोर्ड और कंप्यूटरमाउस के तारों को सीधा जियो सेटटॉप बॉक्स से जोड़ दें। मेन स्क्रीन पर जियो-पीसी ऐप को लॉन्च करें, लॉग इन करें और हो गया जियो-पीसी तैयार।

जियो-पीसी किफायती होने के साथ सुरक्षित कम्प्यूटिंग भी मुहैया कराता है। जियो-पीसी नेटवर्क-स्तरीय सुरक्षा देता है, यह वायरस, मैलवेयर और हैकिंग-प्रूफ है। शॉपिंग, बैंकिंग, ऑनलाइन क्लास, वर्क फ्राम होम, फोटो , वीडियो जैसा ग्राहक का पर्सनल डेटा सुरक्षित तरीके से क्लाउड में स्टोर रहता है। जिसे एक क्लिक पर एक्सेस किया जा सकता है। यूजर अपनी जरूरतों और प्लान के हिसाब से जियो-पीसी के क्लाउड स्टोरेज को बढ़ा सकता है।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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