tet exam-नौकरी बचाने की जद्दोजहद..टीचर से फिर छात्र बने गुरुजी, स्कूलों में नामांकन छोड़ अब TET की तैयारी में जुटे शिक्षक
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद स्कूलों के टीईटी-अनुत्तीर्ण शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, उन्हें सितंबर 2025 तक टीईटी पास करना अनिवार्य है, अन्यथा जबरन सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा। शिक्षक कोचिंग कक्षाओं में शामिल हो रहे हैं।

tet exam-बदायूं। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में इन दिनों एक अजीब नजारा देखने को मिल रहा है। जो शिक्षक बच्चों का भविष्य संवारने के लिए कक्षाओं में होते थे, वे अब खुद अपनी नौकरी बचाने के लिए ‘छात्र’ बनकर मोबाइल और किताबों में डूबे नजर आ रहे हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ा है, जिसमें बिना शिक्षक पात्रता परीक्षा (tet exam) पास किए नौकरी कर रहे शिक्षकों के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
बदायूं सहित पूरे प्रदेश में ऐसे हजारों शिक्षक अब गहरे तनाव में हैं और स्कूल के शैक्षणिक कार्यों से ज्यादा अपना ध्यान टीईटी की तैयारी पर लगा रहे हैं।
दरअसल, सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है, चाहे उनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के लागू होने से पहले ही क्यों न हुई हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ये शिक्षक दो साल के भीतर परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो उन्हें जबरन सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) दे दी जाएगी। इस फैसले ने दशकों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों की रातों की नींद उड़ा दी है।
आलम यह है कि 1 अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र और नामांकन प्रक्रिया पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। शिक्षक नामांकन बढ़ाने के बजाय खाली समय में मोबाइल पर ऑनलाइन क्लास और कोचिंग नोट्स पढ़ते देखे जा रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली में धरना दिया और संसद से विशेष कानून बनाने की गुहार भी लगाई, लेकिन अब तक केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
उत्तर प्रदेश में जुलाई माह में प्रस्तावित टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसमें कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से कॉलम जोड़े गए हैं। इससे शिक्षकों को लगने लगा है कि सरकार अब नियमों में ढील देने के मूड में नहीं है। ऐसे में अपनी सेवा को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग का सहारा लिया है।
tet exam/ कई वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि इस उम्र में फिर से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना मानसिक रूप से काफी कठिन है, लेकिन आजीविका का सवाल होने के कारण उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान तो शिक्षक किसी तरह कक्षाओं में गंभीरता दिखाते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे पूरी ऊर्जा परीक्षा की तैयारी में खर्च हो रही है। शिक्षकों का मानना है कि यदि नौकरी ही नहीं बचेगी, तो वे बच्चों का भविष्य कैसे संवारेंगे। इसी उहापोह के बीच बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता और नए नामांकन के लक्ष्य प्रभावित हो रहे हैं।



