सिस्टम की परख: कलेक्टर के सामने खुलीं ज़मीनी उलझनें, पेंशन अटकी–आवास अधूरा–रास्ता बंद, फरियादों की लंबी कतार
जनदर्शन में सिस्टम की परख: कलेक्टर के सामने खुली ज़मीनी उलझनें

बिलासपुर…साप्ताहिक जनदर्शन में इस बार सिर्फ आवेदन नहीं आए, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की जमीनी तस्वीर भी सामने आई। कलेक्टर संजय अग्रवाल के सामने दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों और शहरी नागरिकों ने अपनी-अपनी परेशानियां रखीं—कहीं पेंशन दो साल से रुकी है, कहीं आवास की किश्त अटकी है, तो कहीं रास्ते पर अवैध निर्माण से गांव का रास्ता बंद हो गया है।
करीब 150 आवेदन जनदर्शन में पहुंचे। हर आवेदन अपने साथ एक सवाल लेकर आया—काम क्यों अटका, फाइल कहां अटकी और जिम्मेदारी किसकी है। कलेक्टर ने सभी मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए।
बेलतरा तहसील के ग्राम टेकर की चंद्रिका बाई साहू ने बताया कि विधवा पेंशन दो वर्षों से बंद है। मामला समाज कल्याण विभाग को सौंपा गया।
ग्राम सिंघरी की मालती बाई ने पीएम आवास योजना की तीसरी किश्त न मिलने की शिकायत की, जिसे जिला पंचायत सीईओ को जांच के लिए भेजा गया।
तेंदुआ गांव के ग्रामीणों ने तालाब तक जाने वाले रास्ते पर अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया, जिस पर एसडीएम कोटा को जांच सौंपी गई।
मदनपुर की बसंती बाई देवार ने आगजनी से हुए नुकसान की सहायता मांगी, वहीं दिव्यांग रवि निषाद ने दिव्यांग पेंशन का लाभ दिलाने की गुहार लगाई।
शहर की शांति परदेशी ने नामांतरण आदेश के बाद भी बी-1 प्रविष्टि न होने की शिकायत रखी, जिसे एसडीओ को सौंपा गया।
जनदर्शन में सामने आई इन शिकायतों ने एक बार फिर यह साफ किया कि योजनाएं कागज पर तो चल रही हैं, लेकिन कई मामलों में लाभार्थी अब भी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जनदर्शन लोगों के लिए मंच है, पर असली कसौटी उन निर्देशों पर होगी, जो अब फाइलों से निकलकर जमीन तक पहुंचते हैं या नहीं।





