चैतन्य बघेल की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार की चुनौती पर हफ्तेभर में सुनवाई
शराब घोटाले में जमानत की परीक्षा, चैतन्य बघेल मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में

दिल्ली…कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह बाद सुनवाई करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर एक साथ विचार किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने दलील दी कि जमानत मिलने के बाद एक अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। अदालत को यह भी बताया गया कि प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है।
राज्य सरकार का आरोप है कि चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले के प्रमुख आरोपियों और साजिशकर्ताओं में शामिल हैं। वहीं बचाव पक्ष ने कहा कि उच्च न्यायालय ने दो जनवरी को सभी तथ्यों पर विचार कर जमानत दी थी और जांच पहले से ही दो वर्षों से जारी थी।
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, यह कथित घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। एजेंसी का दावा है कि चैतन्य बघेल ने इस दौरान लगभग एक हजार करोड़ रुपये के लेन-देन में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई।
इसी मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री की तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को जमानत के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि उच्च न्यायालय उनकी याचिका पर प्राथमिकता से सुनवाई कर सकता है।





