बिलासपुर ।छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने डाइट दुर्ग में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 अमोघ तिवारी को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवरी भेजने के आदेश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि जब कर्मचारी को डाइट में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का कोई आदेश ही जारी नहीं हुआ था, तो वहां से उसकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर वापस भेजने का सवाल नहीं उठता।

कोर्ट ने राज्य शासन के 3 सितंबर 2026 के आदेश और इसके आधार पर जारी 7 सितंबर के कार्यमुक्ति आदेश को निरस्त कर दिया है। हालांकि, सरकार को नियमानुसार नया आदेश जारी करने की स्वतंत्रता दी गई है।

मामले के अनुसार, अमोघ तिवारी की नियुक्ति 9 जून 2021 को जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग द्वारा अनुकंपा के आधार पर की गई थी।

नियुक्ति के बाद उन्हें डाइट दुर्ग (अछोटी), कुम्हारी में पदस्थ किया गया था। वह वहां सहायक ग्रेड-3 के रूप में लगातार कार्य कर रहे थे।

याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि उन्हें कभी प्रतिनियुक्ति पर डाइट दुर्ग नहीं भेजा गया था।

इसके बावजूद विभाग ने उन्हें वहां से वापस भेजने के नाम पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवरी में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आदेश को तबादले से संबंधित बताया गया। हालांकि, नियुक्ति आदेश और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि अमोघ तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति के बाद सीधे डाइट दुर्ग में पदस्थ किया गया था। उन्हें प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने का कोई आदेश रिकॉर्ड में नहीं मिला।

कोर्ट ने कहा कि यदि आदेश में ‘वापसी’ शब्द का इस्तेमाल गलती से किया गया हो और विभाग का वास्तविक उद्देश्य तबादला करना रहा हो, तब भी मौजूदा आदेश को उसी रूप में बरकरार नहीं रखा जा सकता।

विभाग को कानून के अनुरूप उचित प्रक्रिया अपनाकर नया आदेश जारी करना होगा।

इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 3 सितंबर 2026 के आदेश और उसके आधार पर जारी 7 सितंबर 2026 के कार्यमुक्ति आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि राज्य सरकार चाहे तो लागू नियमों के अनुसार नया आदेश जारी कर सकती है।