TET Exam: TET अनिवार्यता के खिलाफ तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन; बोले- “25 साल की सेवा के बाद अब परीक्षा का दबाव क्यों?”
शुजालपुर में शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी है। दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों का तर्क है कि अनुभव के इस पड़ाव पर परीक्षा की अनिवार्यता उनके साथ अन्याय है।

Tet exam।शुजालपुर: मध्य प्रदेश के शुजालपुर में शुक्रवार को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में एकत्रित हुए शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल द्वारा जारी हालिया आदेशों को ‘अन्यायपूर्ण’ बताते हुए मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों की स्पष्ट मांग है कि जो शिक्षक पहले से कार्यरत हैं, उनके लिए इस परीक्षा को तुरंत निरस्त किया जाए और शासन न्यायालय में उनके पक्ष में प्रभावी पैरवी करे।
“नियमों के तहत हुई थी भर्ती, अब नया दबाव क्यों?”
ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 1995 से 2023 के बीच नियुक्त हुए शिक्षा कर्मी और संविदा शिक्षकों की भर्ती तत्कालीन शासन के कड़े नियमों और व्यापम (PEB) की प्रक्रियाओं के तहत हुई थी। शिक्षकों का तर्क है कि:
- जो शिक्षक दशकों से स्कूलों में अध्यापन करा रहे हैं, उनकी योग्यता पर अब सवाल उठाना गलत है।
- अनुभवी शिक्षकों पर सेवा के इस मोड़ पर TET पास करने का दबाव बनाना मानसिक प्रताड़ना के समान है।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 की शर्तों को पिछली तारीख से लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
सरकार से ‘प्रभावी पैरवी’ की मांग।TET Exam
शिक्षकों ने राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में चल रहे इस मामले में शासन की ओर से ठोस कानूनी पक्ष रखा जाए। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि सरकार को ऐसी पैरवी करनी चाहिए जिससे पहले से कार्यरत (In-service) शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्ति मिल सके।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक नेता जितेन्द्र यादव, जसमत सिंह बेस, मनोहर सिंह यादव और शिवम नेमा सहित भारी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। गजराज कलवा, ओमप्रकाश मेवाडा और रामदयाल प्रजापति ने शासन को दोटूक चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदेश स्तर पर आंदोलन को और तेज करेंगे।



