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aaj ka mausam kaisa rahega- पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश का डबल अटैक.. गिरेगा पारा, यूपी-बिहार में घने कोहरे का साया

aaj ka mausam kaisa rahega/पहाड़ी राज्यों में हो रही भारी बर्फबारी और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में हुई झमाझम बारिश ने एक बार फिर कड़ाके की ठंड की वापसी करा दी है।

aaj ka mausam kaisa rahega/मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 घंटों के भीतर उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में देखने को मिलेगा, जहां ठिठुरन बढ़ने के साथ-साथ घने कोहरे का साया भी गहराने वाला है।

शुक्रवार को दिल्ली के कई हिस्सों में हुई हल्की से मध्यम बारिश के बाद शनिवार को भी बादल छाए रहने और शीतलहर चलने का अनुमान है, जिससे दिल्ली का न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क सकता है और अधिकतम तापमान 17 डिग्री के आसपास बना रहेगा।

उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में यहां ठंड की तीव्रता थोड़ी कम हुई थी, लेकिन अब घना कोहरा एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में सुबह के समय दृश्यता (विजिबिलिटी) बेहद कम रह सकती है, जिससे यातायात पर असर पड़ेगा। इन राज्यों में न्यूनतम तापमान 11 से 15 डिग्री के बीच रहने की उम्मीद है, जबकि 26 से 28 जनवरी के बीच हल्की बारिश की भी संभावना जताई गई है।

गणतंत्र दिवस के आसपास होने वाली यह संभावित बारिश मैदानी इलाकों में गलन को और बढ़ा सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अगले दो दिनों तक घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है।

पहाड़ों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लंबे इंतजार के बाद कुदरत का अद्भुत नजारा देखने को मिला है। हिमाचल की राजधानी शिमला में करीब तीन महीने के लंबे इंतजार के बाद मौसम की पहली बर्फबारी हुई, जिससे पर्यटकों और स्थानीय कारोबारियों में भारी उत्साह है।

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों जैसे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और औली में भी बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। मसूरी, चकराता और धनोल्टी जैसे पर्यटन स्थलों पर मकान, पेड़ और सड़कें सफेद नजर आ रही हैं। यह बर्फबारी केवल पर्यटकों के लिए ही नहीं, बल्कि सेब उत्पादकों और बागवानों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है, जो लंबे समय से इसकी प्रतीक्षा कर रहे थे।aaj ka mausam kaisa rahega

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