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कही-सुनी : बंगाल चुनाव के बाद भाजपा सत्ता-संगठन में बदलाव

प्रदेश के नेता या अजय चंद्राकर को न चाहने वाले कुछ भी शिगूफा छोड़ें, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा कौन जाएगा, इसका फैसला तो दिल्ली करेगा। पिछली दफे राज्यसभा के लिए देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम कैसे आया किसी को पता भी नहीं चल पाया। इस बार अप्रैल में छत्तीसगढ़ के कोटे से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही है। मार्च में चुनाव है। एक-एक सीटें भाजपा और कांग्रेस के खाते में आएंगी।

रवि भोई/कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों के चुनाव के बाद देश के साथ भाजपा सत्ता और संगठन में फेरबदल होगा। चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में कुछ केंद्रीय मंत्री शामिल हो सकते हैं। सुनने में आ रहा है कि छत्तीसगढ़ के एक मंत्री भी नितिन की टीम में जा सकते हैं। तय माना जा रहा है कि नितिन की टीम में छत्तीसगढ़ से एक-दो नेता तो रहेंगे ही। राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम बनने के बाद राज्य मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें हैं। कुछ मंत्रियों को ड्राप करने के साथ कुछ के विभाग बदले जा सकते हैं। खबर है कि बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा अगले महीने हो जाएगी। अप्रैल में चुनाव निपट जाएगा। तब तक छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र भी संपन्न हो जाएगा और राज्यसभा के चुनाव भी निपट जाएंगे। अप्रैल-मई में राज्य की विष्णुदेव साय सरकार का कार्यकाल भी करीब-करीब ढ़ाई साल हो जाएगा।

भरोसे के अफसर
2006 बैच के आईएएस अंकित आनंद को साय सरकार का काफी भरोसेमंद और रिजल्ट देने वाला अफसर माना जा रहा है। इसके चलते साय सरकार अंकित आनंद को नई -नई जिम्मेदारियां देते जा रही है। अंकित आनंद आवास और पर्यावरण विभाग, पंजीयन और आईटी विभाग के सचिव हैं। वे पर्यावरण मंडल और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। आईटी को छोड़कर अन्य विभागों के मंत्री ओपी चौधरी हैं। अब सरकार ने उन्हें छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का सीईओ भी बना दिया है। बताते हैं छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण साय सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस प्राधिकरण के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर )की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (सीआरडीए) की संरचना का प्रस्ताव है। एनसीआर में उत्तरप्रदेश,हरियाणा और राजस्थान के कई शहर शामिल हैं। सीआरडीए में राजधानी के आसपास के जिलों के कई शहर को शामिल किए जाने की खबर है। अब अंकित आनंद कई दायित्वों के साथ एनसीआर की तर्ज पर सीआरडीए को किस तरह अमलीजामा पहनाते हैं और सरकार के भरोसे पर कितने खरा उतरते हैं ,इसका लोगों को इंतजार है।

आखिर मिल गया पत्रकारिता विवि को कुलपति
लंबे इंतजार के बाद राज्य के पत्रकारिता विश्वविद्यालय ( कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय ) को कुलपति मिल गया। कई महीनों से रायपुर कमिश्नर महादेव करे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को चला रहे थे। हिसार (हरियाणा) के प्रोफ़ेसर मनोज दयाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय को चलाएंगे। प्रोफ़ेसर मनोज दयाल रिटायर्ड हैं,सो आर्डर निकलते ही अगले दिन सुबह-सुबह हिसार से रायपुर पदभार ग्रहण करने पहुंच गए। अब तक पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति छत्तीसगढ़ के बाहर के ही बने हैं। चर्चा है कि एक छत्तीसगढ़िया भी कुलपति की दौड़ में था,पर समीकरण बैठा नहीं पाने के कारण चूक गया। अब प्रोफ़ेसर मनोज दयाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय का किस तरह और कितना कायाकल्प कर पाते हैं, या फिर वानप्रस्थ काटकर चले जाते हैं ,यह तो समय बताएगा। बताते हैं कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति के लिए कुल छह लोगों ने आवेदन किया था, जिसमें तीन तो पहले राउंड में ही कट गए। तीन का पैनल बना। पैनल में ही कुछ लोगों ने सवाल उठा दिया था। आखिर में दो ही दावेदार बचे, जिसमें प्रोफ़ेसर मनोज दयाल बाजी मार गए।

क्या अजय चंद्राकर को भेजा जाएगा राज्यसभा ?
प्रदेश में बड़ा हल्ला है कि पूर्व मंत्री और कुरुद के विधायक अजय चंद्राकर को राज्यसभा भेजा जा सकता है। अजय चंद्राकर चार बार के विधायक हैं और डॉ रमन सिंह की सरकार में दो टर्म मंत्री रहे। साय मंत्रिमंडल में कुर्मी समाज से टंकराम वर्मा को मंत्री बनाए जाने से अजय चंद्राकर मंत्री पद की दौड़ से बाहर हो गए। कहते हैं विधानसभा के भीतर अजय चंद्राकर आक्रामक तेवर अपनाते हैं। कई मंत्री तो उनके चक्रव्यूह में फंस जाते हैं और बचाव की मुद्रा में नजर आते हैं। चर्चा चल पड़ी है कि अजय चंद्राकर की रणनीति से साय सरकार के कुछ पावरफुल मंत्री और संगठन के कुछ नेता उनको दिल्ली भेजकर अपनी साख बचाने के फेर में हैं। लोकसभा चुनाव में सांसदी का टिकट देकर जिस तरह बृजमोहन अग्रवाल को राज्य की राजनीति से दूर किया गया, वैसे ही अजय चंद्राकर को राज्यसभा में भेजकर प्रदेश की राजनीति से हटाने की बात राजनीतिक गलियारों में चल पड़ी है। प्रदेश के नेता या अजय चंद्राकर को न चाहने वाले कुछ भी शिगूफा छोड़ें, छत्तीसगढ़ से राज्यसभा कौन जाएगा, इसका फैसला तो दिल्ली करेगा। पिछली दफे राज्यसभा के लिए देवेंद्र प्रताप सिंह का नाम कैसे आया किसी को पता भी नहीं चल पाया। इस बार अप्रैल में छत्तीसगढ़ के कोटे से राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही है। मार्च में चुनाव है। एक-एक सीटें भाजपा और कांग्रेस के खाते में आएंगी।

आईएएस बनने का रिकार्ड
यूपीएससी ने इस बार सात डिप्टी कलेक्टरों और एलाइड सेवा के दो अफसरों को आईएएस अवार्ड किया। इस बार की प्रमोटी आईएएस की सूची कई मायनों में महत्वपूर्ण है और चर्चित भी। बीरेंद्र बहादुर पंचभाई ने नायब तहसीलदार से आईएएस बनने का रिकार्ड बना लिया। आमतौर पर नायब तहसीलदार पदोन्नत होकर डिप्टी कलेक्टर तक पहुँच पाते हैं। अनुकंपा नियुक्ति वाले डिप्टी कलेक्टर सौमिल रंजन चौबे भी आईएएस बन गए। सौमिल रंजन नक्सली हमले में शहीद आईपीएस विनोद कुमार चौबे के पुत्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सौमिल रंजन को डिप्टी कलेक्टर के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी थी। डिप्टी कलेक्टर से आईएएस बनने वाले सुमित अग्रवाल और संदीप अग्रवाल भाई हैं। पिछले साल आईएएस से चूके तीरथराज अग्रवाल को इस बार आईएएस मिल गया। तीरथराज अभी वन मंत्री केदार कश्यप के ओएसडी हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के ओएसडी आशीष टिकरहिया भी आईएएस बन गए हैं। वित्त सेवा के ऋषभ कुमार पाराशर और जीएसटी के अधिकारी तरुण कुमार किरण भी आईएएस बन गए। चर्चा है कि इस बार आईएएस बनने वाले दो अफसरों पर राज्य के एक सचिव स्तर के अधिकारी की बड़ी कृपा बरसी।

सवाल एसडीएम की साख का
प्रशासन में कलेक्टर के बाद एसडीएम की बड़ी भूमिका होती है, पर छत्तीसगढ़ में घटित कुछ घटनाओं ने एसडीएम पद की गरिमा को धूल-धूसरित कर दिया है। पिछले महीने गरियाबंद जिले के मैनपुर के एसडीएम अश्लील नृत्य देखने चले गए और अब बलरामपुर जिले के कुसमी के एसडीएम ने एक ग्रामीण को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। सरकार ने दोनों एसडीएम को निलंबित कर दिया है, पर बड़ा सवाल है कि पद की गरिमा का मान नहीं रख पाने वालों को क्या लोक सेवक रहना चाहिए। दोनों एसडीएम लोक सेवक ही हैं। लोक सेवकों तो संवेदनशील होना चाहिए। लगता है कि लोक सेवकों को अब ज्यादा प्रशिक्षण और उन्हें उनके कर्तव्य का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है। दैहिक शोषण के आरोप में एक एक डिप्टी कलेक्टर के निलंबित होने की भी खबर आई है। ऐसी खबरों से निचले स्तर के प्रशासनिक सेवाओं पर जनता का भरोसा टूटते देर नहीं लगेगी। समय है सरकार सख्त हिदायत दे और उन्हें जबावदेह बनाए।

नेता प्रतिपक्ष के रुख पर नजर
विधानसभा का बजट सत्र 23 फ़रवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार बजट सत्र ज्यादा लंबा तो नहीं है, पर विपक्ष के लिए अवसर है। विपक्ष के पास कई मुद्दे हैं। धान खरीदी से लेकर किसान की पिटाई और अन्य घटनाओं को लेकर विपक्ष सदन में आक्रामक हो सकता है, पर सबकी नजर नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत पर है। डॉ महंत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है। मध्यप्रदेश में मंत्री, केंद्र में मंत्री, छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं। सदन में नेता प्रतिपक्ष की बड़ी भूमिका होती है। नेता प्रतिपक्ष के रुख से सदन का माहौल तय होता है। अब देखते हैं बजट सत्र में विपक्ष की भूमिका किस तरह की रहती है और सदन का वातावरण कैसा रहता है।

आईएफएस अधिकारी बजाज अब जिंदल ग्रुप में
रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी एस एस बजाज अब जिंदल स्टील के रायपुर आफिस संभालेंगे। वे प्रदीप टंडन का स्थान लेंगे। प्रदीप टंडन 31 मार्च को जिंदल स्टील को अलविदा कह देंगे। प्रदीप टंडन काफी साल जिंदल स्टील एंड पावर में रहे। एस एस बजाज ने जिंदल स्टील ज्वॉइन कर लिया है। भूपेश बघेल के कार्यकाल में श्री बजाज नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे। डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में वे एनआरडीए के सीईओ रहे। बजाज साहब छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के डीजी का पद भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा सरकार के कई विभागों की जिम्मेदारी उनके पास रही है। श्री बजाज ने सरकार के बाद अब कारपोरेट में कदम रखा है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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