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health cess on cigarettes – 1 फरवरी से बदल रहा है सिगरेट और पान मसाले पर टैक्स का गणित, अब सीसीटीवी की नजर में तैयार होगा हर पैकेट

स नए टैक्स ढांचे के तहत अब सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) लगाई जाएगी। वहीं, पान मसाले के शौकीनों की जेब पर 'हेल्थ सेस' और 'नेशनल सिक्योरिटी सेस' का नया बोझ भी दिखाई देगा। यह नई व्यवस्था साल 2017 से चली आ रही पुरानी जीएसटी कंपनसेशन सेस प्रणाली की जगह लेगी।

health cess on cigarettes/देश में 1 फरवरी से सिगरेट, तंबाकू उत्पादों और पान मसाले का व्यापार करने वाली कंपनियों के लिए नियम पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। भारत सरकार इन ‘सिन गुड्स’ (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुएं) पर नियंत्रण सख्त करने और टैक्स चोरी को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से एक नया टैक्स सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।

इस नए बदलाव का सीधा असर इन उत्पादों के उत्पादन से लेकर उनकी कीमतों और निगरानी तंत्र पर पड़ेगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इन उत्पादों पर टैक्स का स्तर ऊंचा बना रहे ताकि इनके सेवन को हतोत्साहित किया जा सके और साथ ही सरकारी राजस्व में होने वाली किसी भी तरह की लीकेज को रोका जा सके।

इस नए टैक्स ढांचे के तहत अब सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) लगाई जाएगी। वहीं, पान मसाले के शौकीनों की जेब पर ‘हेल्थ सेस’ और ‘नेशनल सिक्योरिटी सेस’ का नया बोझ भी दिखाई देगा। यह नई व्यवस्था साल 2017 से चली आ रही पुरानी जीएसटी कंपनसेशन सेस प्रणाली की जगह लेगी।health cess on cigarettes

एक बड़ा बदलाव तंबाकू से जुड़े उत्पादों जैसे चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा और गुटखा के मूल्यांकन के तरीके में किया गया है। अब तक इन उत्पादों पर टैक्स की गणना फैक्ट्री कीमत के आधार पर होती थी, लेकिन अब सरकार ‘एमआरपी (MRP) आधारित मूल्यांकन’ सिस्टम लागू कर रही है। यानी अब पैकेट पर छपी खुदरा कीमत के आधार पर ही जीएसटी वसूला जाएगा, जिससे कंपनियों के लिए कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाना नामुमकिन होगा।health cess on cigarettes

सिर्फ टैक्स ही नहीं, बल्कि इन उत्पादों को बनाने वाली फैक्ट्रियों की निगरानी भी अब अभूतपूर्व तरीके से की जाएगी। 1 फरवरी से पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को न केवल नए कानूनों के तहत दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा, बल्कि अपनी फैक्ट्रियों के भीतर हर एक पैकिंग मशीन पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा।

सरकार ने निर्देश दिया है कि इन कैमरों की रिकॉर्डिंग को कम से कम दो साल तक सुरक्षित रखना होगा ताकि जरूरत पड़ने पर एक्साइज अधिकारी उत्पादन की सही मात्रा की जांच कर सकें।

कंपनियों को अपनी मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की पूरी जानकारी पहले ही अधिकारियों को देनी होगी।health cess on cigarettes

हालांकि, नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह प्रावधान भी किया गया है कि यदि कोई मशीन लगातार 15 दिनों तक बंद रहती है, तो कंपनी उस अवधि के लिए एक्साइज ड्यूटी में छूट का दावा कर सकेगी।

व्यापार जगत और उपभोक्ताओं के मन में बड़ा सवाल यह है कि क्या इन बदलावों से कीमतें आसमान छूने लगेंगी? सरकार ने इस मोर्चे पर स्पष्ट किया है कि भले ही टैक्स वसूलने का तरीका बदला है, लेकिन पान मसाले पर कुल टैक्स का बोझ बहुत ज्यादा नहीं बढ़ेगा। 40 प्रतिशत जीएसटी को मिलाकर कुल टैक्स का स्तर मौजूदा 88 प्रतिशत के आसपास ही बना रहने की उम्मीद है।

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