Guidelines for Coaching Institutes : कोचिंग संस्थानों पर पुलिस का शिकंजा.. रजिस्ट्रेशन से लेकर सीसीटीवी और स्टाफ वेरिफिकेशन तक, जारी हुई नई गाइडलाइन
बिहार पुलिस ने राज्य के कोचिंग संस्थानों हेतु नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अब पंजीकरण, सुरक्षा ऑडिट, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, CCTV निगरानी और आपातकालीन सुविधाएं अनिवार्य होंगी. छात्र सुरक्षा, स्वच्छता और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. अनुपस्थिति व प्रदर्शन की जानकारी अभिभावकों को देना भी आवश्यक होगा, जिससे छात्रों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके.

Guidelines for Coaching Institutes/पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बिहार पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों के लिए अब कड़े सुरक्षा मानक तय कर दिए गए हैं।
बिहार पुलिस के आधिकारिक फेसबुक पेज के माध्यम से जारी इन नए दिशा-निर्देशों में कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से लेकर सुरक्षा ऑडिट और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नए निर्देशों के अनुसार, बिहार में चलने वाले हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य होगा और संस्थान को अपनी रजिस्ट्रेशन संख्या रिसेप्शन पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए संस्थान में काम करने वाले हर कर्मचारी का पुलिस वेरिफिकेशन (चरित्र प्रमाणन) कराना भी अब अनिवार्य कर दिया गया है।
साथ ही, पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी, बायोमेट्रिक हाजिरी और आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। महिला सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए पुलिस ने निर्देश दिया है कि छात्राओं के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध और अलग से साफ-सुथरे शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए।
स्वास्थ्य और स्वच्छता के मोर्चे पर भी पुलिस ने कड़े मानक तय किए हैं।
संस्थान परिसर में शुद्ध पेयजल और बीमार छात्रों के लिए अलग बैठने की जगह होनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोचिंग संचालकों को अब छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा। यदि कोई छात्र असामान्य व्यवहार या अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार दिखता है, तो इसकी सूचना तुरंत उनके अभिभावकों को देनी होगी। इसके साथ ही, छात्र-छात्राओं के मानसिक कल्याण के लिए करियर काउंसलिंग और साइकोलॉजिकल काउंसलिंग की व्यवस्था करना भी अब अनिवार्य होगा।
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक संस्थान के रिसेप्शन पर स्थानीय थाने, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और इमरजेंसी नंबर 112 के पोस्टर लगाने होंगे।
छात्राओं और स्टाफ को ‘112 इंडिया ऐप’ के वूमेन सेफ्टी फीचर्स के बारे में शिक्षित करना होगा। इसके अलावा, अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा और भूकंप, बाढ़ या आग जैसी आपदाओं से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित करनी होगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट न कराने वाले संस्थानों को जल्द से जल्द ऑडिट कराने का परामर्श दिया जाएगा।
प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए भी नए नियम लागू किए गए हैं। कोचिंग संस्थानों को अब अभिभावकों के साथ सीधा संवाद तंत्र (मैसेज या नोटिफिकेशन) विकसित करना होगा, ताकि छात्रों की अनुपस्थिति और टेस्ट रिजल्ट की जानकारी तुरंत दी जा सके। परिवहन सुविधा देने वाले संस्थानों को अपने चालकों और सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा। साथ ही, नामांकन के लिए दलालों का सहारा लेने वाले संस्थानों पर भी पुलिस की पैनी नजर रहेगी।





