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Bilaspur

गेवरा में देश की ऊर्जा ताकत— सिक्किम के पत्रकारों ने देखा हरित, सुरक्षित और हाईटेक कोयला खनन का नया भारत

मियावाकी पद्धति के सघन पौधारोपण क्षेत्र ने मीडिया प्रतिनिधियों को खासा प्रभावित किया

बिलासपुर…देश की ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानी जाने वाली एशिया की सबसे विशाल कोयला खदान गेवरा मंगलवार को राष्ट्रीय मीडिया विमर्श का केंद्र बनी, जब सिक्किम से आए 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने यहां आधुनिक, पर्यावरण-संतुलित और सुरक्षित कोयला खनन को ज़मीनी स्तर पर देखा। यह दौरा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय सिक्किम और छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य कोयला उत्पादन के साथ-साथ सतत विकास की वास्तविक तस्वीर सामने लाना था।

भ्रमण के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने गेवरा खदान में संचालित अत्याधुनिक एचईएमएम मशीनों और सरफेस माइनर आधारित ब्लास्ट-फ्री कोयला उत्खनन प्रक्रिया को नज़दीक से देखा। यह तकनीक पारंपरिक विस्फोटक खनन की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित मानी जाती है और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को भी काफी हद तक कम करती है। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि इसी तकनीकी बदलाव के कारण गेवरा आज उत्पादन के साथ-साथ सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का भी उदाहरण बन चुका है।

मीडिया दल ने फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी के माध्यम से अपनाई जा रही कोयला डिस्पैच व्यवस्था का भी अवलोकन किया, जहां कन्वेयर बेल्ट और साइलो प्रणाली के जरिए कोयले का परिवहन किया जा रहा है। इस व्यवस्था से न केवल धूल-उत्सर्जन पर नियंत्रण संभव हुआ है, बल्कि परिवहन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज़ और दक्ष बनी है। सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होने से आसपास के इलाकों में प्रदूषण और दुर्घटनाओं का जोखिम भी घटा है।

खनन क्षेत्र के बीच विकसित मियावाकी पद्धति से किए गए सघन पौधारोपण ने प्रतिनिधिमंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया। खदान परिसर में हरियाली का यह विस्तार इस बात का संकेत है कि उत्पादन और पर्यावरण के बीच संतुलन अब केवल कागज़ी दावा नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत बनता जा रहा है। पत्रकारों ने माना कि कोयला खनन को लेकर बनी पारंपरिक धारणा यहां आकर पूरी तरह बदलती नजर आई।

अपने अनुभव साझा करते हुए मीडिया प्रतिनिधियों ने कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने कोयला खनन को इतनी नज़दीक से और इतने व्यापक दृष्टिकोण के साथ देखा। उनके अनुसार, एसईसीएल देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच संतुलन साधने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है, जो गेवरा में साफ दिखाई देता है।

गेवरा खदान भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में संगठन के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ संवाद किया। इस दौरान निदेशक (तकनीकी–संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (एचआर) बिरंची दास और निदेशक (तकनीकी–योजना/परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र ने एसईसीएल की भावी योजनाओं, सतत विकास लक्ष्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व पहलों पर विस्तार से जानकारी दी।

यह दौरा केवल एक औपचारिक मीडिया विज़िट नहीं रहा, बल्कि इसने यह स्पष्ट किया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा अब केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि तकनीक, पारदर्शिता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के मजबूत आधार पर आगे बढ़ रही है। गेवरा खदान आज इसी बदली हुई सोच और नए भारत के ऊर्जा मॉडल का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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