पुलिसिया मनमानी पर कोर्ट का हथौड़ा: एसएचओ की जल्दबाजी असंवैधानिक, डीजीपी को जांच-कार्रवाई के निर्देश
संवैधानिक सुरक्षा उपायों और स्थापित प्रक्रियात्मक नियमों की खुली अवहेलना

बिलासपुर…अदालत ने पुलिस कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए एक अहम मामले में एसएचओ सिद्बू के आचरण को लापरवाह और जल्दबाजी से भरा हुआ करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह रवैया संवैधानिक सुरक्षा उपायों और स्थापित प्रक्रियात्मक नियमों की खुली अवहेलना है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे एसएचओ सिद्बू के पूरे आचरण की उचित स्तर पर जांच कराएं और यदि जांच में आवश्यकता प्रतीत हो तो कानून के अनुसार सुधारात्मक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इतना ही नहीं, अदालत ने यह भी निर्देशित किया है कि डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि संबंधित एसएचओ को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए बाध्यकारी दिशानिर्देशों—विशेष रूप से अर्नेश कुमार बनाम राज्य, सत्येंद्र कुमार एंटिल बनाम सीबीआई और डी.के. बसु बनाम राज्य मामलों में तय मानकों—के प्रति औपचारिक रूप से संवेदनशील और जागरूक किया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एसएचओ के भविष्य के आचरण को प्रभावी पर्यवेक्षी निगरानी में रखा जाए, ताकि दोबारा इस तरह की चूक न हो। साथ ही डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अधीन सभी पुलिस इकाइयों को स्पष्ट स्थायी निर्देश जारी करें, जिनमें यह दोहराया जाए कि गिरफ्तारी, रिमांड या हिरासत के दौरान उपचार से जुड़े संवैधानिक और वैधानिक सुरक्षा उपायों से किसी भी प्रकार का विचलन गंभीर विभागीय परिणामों को जन्म देगा।
अदालत ने पुलिस अधिकारियों को यह याद दिलाया कि पुलिस अधिकारों का प्रयोग संयम, जवाबदेही और कानून के शासन के सख्त पालन के साथ किया जाना अनिवार्य है, न कि मनमानी या जल्दबाजी के आधार पर।





