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कमांडर पापाराव का सरेंडर, 25 लाख के इनामी ने 12 साथियों संग डाले हथियार; CM बोले- टूटी माओवाद की कमर

करीब 52 से 55 वर्षीय पापाराव, जिसे नक्सली गलियारों में सुनाम चंद्राया, मंगू दादा और चंद्रन्ना जैसे कई नामों से जाना जाता है, लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वह न केवल राज्य क्षेत्रीय समिति (SZCM) का अहम सदस्य था, बल्कि पश्चिम बस्तर डिवीजन के प्रभारी के रूप में पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

रायपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में नक्सलवाद के खिलाफ जारी निर्णायक जंग में सुरक्षाबलों को आज एक ऐतिहासिक और रणनीतिक सफलता हाथ लगी है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा नक्सल खात्मे के लिए तय की गई ‘डेडलाइन’ से ठीक पहले माओवादियों के सबसे बड़े चेहरों में से एक, टॉप नक्सल कमांडर पापाराव ने अपने 12 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है।

25 लाख रुपये के भारी-भरकम इनामी पापाराव का यह सरेंडर बस्तर में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इस खूंखार कमांडर ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है।

करीब 52 से 55 वर्षीय पापाराव, जिसे नक्सली गलियारों में सुनाम चंद्राया, मंगू दादा और चंद्रन्ना जैसे कई नामों से जाना जाता है, लंबे समय से सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वह न केवल राज्य क्षेत्रीय समिति (SZCM) का अहम सदस्य था, बल्कि पश्चिम बस्तर डिवीजन के प्रभारी के रूप में पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पापाराव छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित दुर्गम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में सक्रिय था, जो माओवादियों का अभेद्य किला माना जाता रहा है। कभी 30 से 35 अत्याधुनिक हथियारों से लैस लड़ाकों की फौज के साथ चलने वाला यह कमांडर सुरक्षाबलों की हालिया आक्रामक कार्रवाई के चलते महज 5 सदस्यों के छोटे समूह तक सिमट कर रह गया था, जिसने उसे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अटूट संकल्प की जीत बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ जो अभियान छेड़ा गया है, उसके परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब बेहद करीब है और ऐसे में पापाराव जैसे मास्टरमाइंड का हथियार डालना इस बात का प्रमाण है कि नक्सलवाद की विचारधारा अब अंतिम सांसें ले रही है। सीएम ने कहा कि बस्तर में शांति की बहाली अब दूर नहीं है और भटके हुए युवाओं के पास सरेंडर कर सम्मानजनक जीवन जीने का यह आखिरी मौका है।

पापाराव के साथ सरेंडर करने वाले 12 अन्य साथियों के पास से भी महत्वपूर्ण जानकारी और हथियार मिलने की संभावना है, जिससे बस्तर के सुदूर इलाकों में छिपे अन्य नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाया जा सकेगा। पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पापाराव के जाने से पश्चिम बस्तर में नक्सलियों का सूचना तंत्र और नेतृत्व पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

राज्य सरकार की ‘लौट आओ’ नीति के तहत सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों को अब समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। फिलहाल, बस्तर के चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबल मुस्तैद हैं और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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