BEO Suspend-युक्तियुक्तकरण में लापरवाही का मामला , कलेक्टर ने किया BEO को सस्पेंड

BEO Suspend-दंतेवाड़ा।छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है, जहाँ शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना एक अधिकारी को महंगा पड़ गया। शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही, मनमानी और जानबूझकर हेरफेर करने के आरोप में गीदम के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) शेख रफीक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। दंतेवाड़ा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने यह कड़ा कदम उठाते हुए निलंबन का आदेश जारी किया है।
BEO Suspend-यह पूरा मामला शासन की महत्वपूर्ण युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना और शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाना था। लेकिन BEO शेख रफीक पर आरोप है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में न केवल घोर लापरवाही बरती, बल्कि जानबूझकर नियमों को ताक पर रखकर शासन की छवि को धूमिल किया।
जानकारी के मुताबिक़, गीदम के विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी शेख रफीक पर शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप है. जिसके चलते अब बीईओ शेख रफीक को अब निलंबित कर दिया गया है. बीईओ के निलंबन को लेकर दंतेवाड़ा कलेक्टर द्वारा कुणाल दुदावत आदेश जारी किया गया है. जारी आदेश में कहा गया है, कि शालाओं एवं शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किये जाने हेतु निर्देशित किया गया था. जिसमे विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी शेख रफीक विकासखण्ड गीदम के द्वारा शासन के द्वारा दिये गये मार्गदर्शी निर्देशों के पालन में गंभीर लापरवाही बरती गई है.
शासन के महत्वपूर्ण कार्य में अनावश्यक विलंब हुआ जिसके कारण शासन की छवि धूमिल हुई है.उन्होंने, युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया अंतर्गत कुटरचना करते हुए विकासखण्ड गीदम के आश्रम शालाओं/विद्यालयों के रिक्त पदों को युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से जानबुझकर पृथक रखा. जिसके कारण गीदम विकासखण्ड में 31 आश्रम शालाओं के रिक्त पदों को शामिल नहीं किया जा सका. जिसके कारण गीदम विकासखण्ड के 20 शिक्षकों का विकासखण्ड से अन्यत्र संस्थाओं में काउंसलिंग के माध्यम से संस्था चुनना पड़ा.
शिक्षकों के लिए युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया हेतु निर्धारित वरिष्ठता में फेरबदल किया गया है. आश्रम अधीक्षकों को अतिशेष से मुक्त रखा जाना चाहिए था किन्तु विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी गीदम द्वारा इसका पालन नहीं किया गया. विशिष्ट संस्थाओं में कार्यरत शिक्षकों को युक्तियुक्तकरण से पृथक रखा जाना था परन्तु विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी गीदम के द्वारा इसका पालन नहीं किया गया. शासन के निर्देशानुसार दिव्यांग व्यक्ति को युक्तियुक्तकरण से पृथक रखा जाना था लेकिन विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी ने दृष्टिबाधित प्रा. शाला बडेपनेड़ा पटेलपारा को अतिशेष की सूची में प्रदर्षित किया.





