बजट में विकास के दावे, शिक्षा से अमेरिका तक सवाल—भाजपा बोली: भारत विरोधी सोच से नहीं रुकेगा विकास
बजट के दावे..भाजपा प्रवक्ता बोले—भारत न बिकेगा, न झुकेगा; आलोचकों को बताया विकास-विरोधी

बिलासपुर…केंद्रीय बजट 2026 को लेकर भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता के.के. शर्मा ने सरकार के दावों का बचाव करते हुए कहा कि यह बजट किसान, युवा, महिला, व्यापारी और मध्यम वर्ग को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने इसे “विकसित भारत” की दिशा में निर्णायक कदम बताया, लेकिन प्रेस वार्ता के दौरान उठे सवालों ने बजट की प्राथमिकताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी।
शिक्षा बजट पर मानक का सवाल
शिक्षा बजट को लेकर यूरेनो मानक से कम फंडिंग के सवाल पर के.के. शर्मा ने कहा कि सरकार शिक्षा के स्तर को तेजी से ऊपर उठाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार की तुलना में शिक्षा बजट में लगातार वृद्धि की गई है और आने वाले समय में भारत शिक्षा के अधिक विकसित स्वरूप की ओर बढ़ेगा।
साथ ही उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि शिक्षा बजट को लेकर रोड़ा अटकाने वाले पहले अपने कार्यकाल के बजट को देखें। उनके मुताबिक, ऐसी सोच रखने वाले लोग भारत के विकास के विरोधी हैं।
घोषणाओं की भरमार, भरोसे की कसौटी
पांच नए विश्वविद्यालय, 2030 तक 20 लाख प्रशिक्षित युवा, पर्यटन क्षेत्र में 10 हजार रोजगार और महिलाओं के लिए स्व-सहायता उद्यमी बाजार—भाजपा ने इन्हें बजट की बड़ी उपलब्धियां बताया।
मगर सवाल यह भी उठा कि क्या पुराने वादों का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया गया है, या नए दावे पुराने अधूरे लक्ष्यों पर परदा डाल रहे हैं?
किसानों के नाम योजनाएँ, ज़मीन पर चुनौती
पशुपालकों के लिए ऋण अनुदान, मत्स्य पालन के लिए तालाब और विशेष फसल योजनाओं का उल्लेख किया गया। लेकिन खेती की बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार के जोखिम पर बजट में ठोस जवाब तलाशे जाते रहे।
इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल और रक्षा: आंकड़े और असर
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च, रेल बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और रक्षा क्षेत्र में घरेलू खरीद पर जोर—इन सबको सरकार ने अपनी उपलब्धि बताया।
विपक्ष की ओर से सवाल यह रहा कि क्या इन बढ़े हुए बजटों का सीधा असर आम नागरिक, यात्री और जवान तक समान रूप से पहुंच रहा है?
अमेरिका डील पर सख्त रुख
अमेरिका के साथ कथित डील को लेकर उठे सवालों पर के.के. शर्मा ने स्पष्ट कहा कि कृषि, टैरिफ या किसी भी रणनीतिक क्षेत्र में भारत के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने दोहराया कि भारत किसी विदेशी दबाव में न पहले झुका है और न आगे झुकेगा।
विकास बनाम जवाबदेही
भाजपा जहां बजट को तेज़ विकास का रोडमैप बता रही है, वहीं आलोचक इसे आंकड़ों का खेल करार दे रहे हैं। सवाल अब सिर्फ़ बजट के आकार का नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शिता, प्राथमिकताओं और ज़मीनी असर का है।





