नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और यह कानून के मुताबिक शिकायतों की सुनवाई करता है, ताकि जिन्हें राहत मिलनी चाहिए, उन्हें वह मिल सके। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, मुझे उनका पत्र कल मिला और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया।

पत्र पर परसों की तारीख थी, लेकिन मैं बाहर था, इसलिए मुझे वह कल मिला। मैंने अपने जवाब में कुछ कारण बताए हैं और उनसे न मिल पाने की अपनी असमर्थता जाहिर की है। मैं आपसे गुजारिश करूंगा कि आप उनसे ही पत्र की सामग्री के बारे में पूछें। मैंने इसकी गोपनीयता बनाए रखी है।

सीजेआई ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति याचिका दायर कर सकता है, चाहे वह आम नागरिक हो या किसी चुने हुए निकाय का सदस्य। भारत के हर नागरिक को हमारे पास आने का अधिकार है। हम कानून के मुताबिक उनकी शिकायतों को सुनेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन्हें राहत मिलनी चाहिए, उन्हें वह मिले।

वन नेशन वन इलेक्शन पर जेपीसी के सुप्रीम कोर्ट दौरे के रद्द होने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, इस मामले में तुलनात्मक रूप से अधिक कारण हैं क्योंकि उस मुद्दे (वन नेशन वन इलेक्शन जेपी बैठक) में कोर्ट में हितों के टकराव की संभावना थी, जिसके कारण हमें प्रशासनिक पहलू पर चर्चा करनी पड़ी। मेरे वरिष्ठ न्यायिक सहयोगियों और मेरी सामूहिक राय थी कि हमें हितों के टकराव की किसी भी स्थिति से बचना चाहिए।

मनाही के बावजूद, इंडी गठबंधन का प्रस्तावित मार्च सोमवार को होने की संभावना है।

यह प्रदर्शन विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों की एक कड़ी का हिस्सा है। इन दलों ने कई मुद्दों के साथ-साथ मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का कहना है कि यह प्रस्तावित मार्च किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि सभी भारतीयों का है। कांग्रेस नेता इस अभियान का दायरा बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार को एसआईआर प्रक्रिया से फायदा हुआ है, जो विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद का एक बड़ा मुद्दा बन गई है।