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Bilaspur

पटरी पर भटका बचपन, RPF बनी सहारा: रेलवे ने 88 नन्हे फरिश्तों की सुरक्षित घर भेजा यानी वापसी

नागपुर…रेलवे स्टेशन की भीड़ में खड़ा एक सहमा हुआ बच्चा… आंखों में डर, चेहरे पर अनजान शहर की घबराहट। ऐसे ही पलों में रेलवे सुरक्षा बल की मौजूदगी सिर्फ वर्दी नहीं, बल्कि उम्मीद बनकर सामने आती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल में ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ ने बीते एक वर्ष में 88 नाबालिग बच्चों को उसी डर और असुरक्षा से बाहर निकालकर सुरक्षित जीवन की ओर लौटाया है।

रेलवे सुरक्षा बल की टीमें रेलगाड़ियों, प्लेटफॉर्म और रेलवे परिसरों में लगातार निगरानी के दौरान उन बच्चों तक पहुंचीं, जो या तो घर से भाग गए थे, या फिर परिजनों से बिछड़कर गलत हाथों में जाने की कगार पर थे। मंडल सुरक्षा आयुक्त दीप चंद्र आर्य के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान ने साबित किया कि सुरक्षा का मतलब सिर्फ कानून नहीं, संवेदना भी है।

वर्ष 2025 में 80 नाबालिग—जिनमें 50 बालक और 30 बालिकाएं शामिल हैं—को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वहीं 2026 की शुरुआत में अब तक 8 और बच्चों को रेलवे सुरक्षा बल ने समय रहते बचा लिया। कई मामलों में ये बच्चे प्लेटफॉर्म पर अकेले बैठे मिले, तो कहीं चलती ट्रेनों में बिना दिशा के सफर करते नजर आए।

रेस्क्यू के बाद बच्चों की जानकारी ट्रैक चाइल्ड पोर्टल में दर्ज कर नियमानुसार उन्हें जिला बाल कल्याण समिति को सौंपा गया, जहां पहचान और जांच पूरी होने के बाद उन्हें उनके माता-पिता या परिजनों के सुपुर्द किया गया। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ मुलाकात नहीं, बल्कि टूटते सपनों के दोबारा जुड़ने का पल था।

ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ महज एक अभियान नहीं, बल्कि रेलवे की पटरियों पर भटकते बचपन के लिए एक सुरक्षा कवच बन चुका है। रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों और आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी स्टेशन या ट्रेन में कोई नाबालिग बच्चा अकेला, घबराया हुआ या संदिग्ध परिस्थिति में दिखाई दे, तो तत्काल आरपीएफ, जीआरपी या नजदीकी रेल कर्मचारी को सूचना दें। आपकी एक सूचना किसी बच्चे की जिंदगी की दिशा बदल सकती है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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