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Chhattisgarh Budget 2026: मोदी की गारंटी पर भारी पड़ी शिक्षकों की निराशा, वेतन विसंगति और पुरानी पेंशन पर चुप्पी से नाराजगी

छत्तीसगढ़ के बजट 2026-27 के पिटारे से जहां कई वर्गों के लिए खुशियां निकलीं, वहीं प्रदेश के शिक्षा जगत का एक बड़ा हिस्सा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। 'मोदी की गारंटी' पर टिकी उम्मीदों के टूटने से अब प्रदेश भर के शिक्षकों में आक्रोश की लहर दौड़ गई है।

Chhattisgarh Budget 2026।रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट ने प्रदेश के करीब 1.80 लाख शिक्षक एलबी संवर्ग (पूर्व शिक्षाकर्मी) को मायूस कर दिया है।

चुनावी वादों और आश्वासनों के बीच शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस बजट में उनकी बरसों पुरानी वेतन विसंगति और क्रमोन्नति जैसी समस्याओं का अंत होगा, लेकिन बजट भाषण में इन मुद्दों पर सन्नाटा रहने से अब आंदोलन की आहट सुनाई देने लगी है।

​छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन और जागरूक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने बजट पर अपनी साझा प्रतिक्रिया में कहा कि यद्यपि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा कर एक सराहनीय कदम उठाया है, लेकिन यह उनकी ‘मूल मांग’ नहीं थी। शिक्षकों का कहना है कि उनकी प्राथमिक लड़ाई आर्थिक न्याय और सेवा शर्तों को लेकर है।

​शिक्षक संगठनों के अनुसार, सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति के कारण एक ही बैच के उन शिक्षकों के बीच 10 से 25 हजार रुपये का मासिक अंतर है, जिनकी पदोन्नति नहीं हो पाई है। शिक्षकों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं।सहायक शिक्षकों के वेतनमान में सुधार कर आर्थिक असमानता दूर करना।

शिक्षाकर्मी के रूप में की गई पहली नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता और क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ।सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षित भविष्य के लिए पुरानी पेंशन योजना की पूर्ण बहाली।

​शिक्षक नेताओं का आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का वादा किया था। अब सरकार के सवा दो साल बीत जाने के बाद भी ठोस निर्णय न होना विश्वासघात जैसा है। संगठनों का कहना है कि एलबी संवर्ग के शिक्षक नियमित शिक्षकों के मुकाबले आज भी वित्तीय भेदभाव का सामना कर रहे हैं, जिससे उनके मनोबल पर गहरा असर पड़ा है।

​बजट में मांगों की अनदेखी से नाराज शिक्षक संगठनों ने सरकार को सीधे तौर पर चेताया है। पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते वेतन विसंगति और पेंशन जैसे मुद्दों पर ठोस नीति नहीं बनाई गई, तो प्रदेश के पौने दो लाख शिक्षक सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

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