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CG NEWS:सूरजपुर पुलिसः अपराध नियंत्रण के साथ समाज में विश्वास और सुरक्षा की नींव

CG NEWS:सूरजपुर (मनीष जायसवाल) । छत्तीसगढ़ का सूरजपुर एक माध्यम छोटे शहर और बड़े आकर का जिला है। जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटा हुआ है, अपनी जटिल भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों के लिए जाना जाता है। जिले की पुलिसिंग के बीते महीने की खबर टटोले तो अगस्त का महीना सूरजपुर पुलिस के लिए कई मायनों में अहम साबित हुआ ..। डीआईजी व एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर के नेतृत्व में सूरजपुर पुलिस ने न केवल अपराध नियंत्रण में उत्कृष्टता हासिल की बल्कि सामुदायिक पुलिसिंग, तकनीकी नवाचार और समाज के साथ जुड़ाव के जरिए एक ऐसी तस्वीर पेश की जो न केवल स्थानीय स्तर पर प्रेरणा दायक है, बल्कि बड़े शहरों की पुलिसिंग के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकती है..। उनकी कार्यशैली सख्ती, संवेदनशीलता, और नवाचार का अनूठा संगम सूरजपुर में पुलिस को जनता का विश्वास पात्र और अपराधियों के लिए खौफ का प्रतीक बना दिया..।
अगस्त महीने की कुछ खबरों पर नजर डाली जाए तो पुलिस कप्तान प्रशांत कुमार ठाकुर ने एक अगस्त को जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में क्राइम मीटिंग आयोजित की जिसमें उन्होंने लंबित मामलों के त्वरित निपटारे, गंभीर अपराधों में सख्ती, और सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर दिया..। थाना-चौकी प्रभारियों को जनता की सेवा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाने के निर्देश दिए गए। उनकी मैदानी सक्रियता और रणनीतिक दृष्टिकोण ने पुलिसिंग की नींव को और मजबूत किया..।

दो अगस्त को “नवजीवन” अभियान के तहत विश्रामपुर में डीएव्ही पब्लिक स्कूल और राजकुमार स्कूल के छात्रों के साथ साइकिल रैली निकाली गई। जिंदगी को हां, नशे को ना के नारे.. के साथ यह रैली नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाने में प्रभावी रही..। श्री ठाकुर ने स्वयं छात्रों को नशे के आर्थिक, सामाजिक, और स्वास्थ्य संबंधी नुकसानों के बारे में बताया, जिससे युवाओं में सकारात्मक बदलाव की लहर पैदा हुई।

पांच अगस्त को सूरजपुर पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाकर कई लीटर शराब जब्त की और 21 लोगों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई । यह कार्रवाई उनकी सख्ती और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वर्ष 2025 में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 31 आरोपियों की गिरफ्तारी और 39 लाख रुपये की नशीली सामग्री की जब्ती ने उनके नेतृत्व में पुलिस की प्रभाव शीलता को और उजागर किया..।

छह अगस्त को रायपुर से अपहृत एक 16 वर्षीय बालक को सूरजपुर पुलिस ने तकनीकी सहायता से खोज कर परिजनों को सौंपा। साथ ही, एक 22 वर्षीय गुमशुदा युवती को भी परिजनों तक पहुंचाया गया। इन मामलों में त्वरित कार्रवाई और संवेदनशीलता ने ठाकुर की मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया, जो बड़े शहरों की पुलिसिंग के लिए भी एक मिसाल है।

सात अगस्त को सूरजपुर पुलिस ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया। ई-समन प्रणाली की शुरुआत ने समन तामील की प्रक्रिया को डिजिटल और तेज बनाया, जिससे न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी। उसी दिन भटगांव-बनारस मार्ग के दुर्घटना जन्य स्थानों का निरीक्षण कर श्री ठाकुर ने साइन बोर्ड, रेडियम, और रंबल स्ट्रिप जैसे सुरक्षा उपायों के निर्देश दिए, जिससे सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिला।

आठ अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर साधुराम विद्या मंदिर स्कूल की छात्राओं ने थाना सूरजपुर में पुलिस जवानों को राखी बांधी..। प्रशांत कुमार ठाकुर ने इस आयोजन को पुलिस और समाज के बीच सौहार्द का प्रतीक बताया, जिसने पुलिस को जनता के और करीब लाया। यह उनकी उस सोच को बताती है कि पुलिस केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न अंग है..।

18 अगस्त को जयनगर थाने के पिकेट चेकिंग पॉइंट का औचक निरीक्षण कर श्री ठाकुर ने सख्त निर्देश दिए कि कोई भी अवैध वस्तु या संदिग्ध पुलिस की नजरों से न बचे। उनकी यह सक्रियता और सख्ती क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रही।

19 अगस्त को विश्रामपुर में कुरियर संचालकों और डिलिवरी कर्मचारियों की बैठक में जिला पुलिस कप्तान प्रशांत कुमार ठाकुर के निर्देश पर संदिग्ध पार्सलों की तत्काल सूचना पुलिस को देने की हिदायत दी गई। यह कदम अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने की उनकी रणनीति का हिस्सा था।

21 अगस्त को बैंक प्रबंधकों के साथ बैठक में प्रशांत कुमार ठाकुर ने साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए बैंकिंग प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और पुलिस के साथ समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने संदिग्ध लेन-देन पर त्वरित कार्रवाई और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 के प्रचार के निर्देश दिए, जिसने डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने की उनकी दूरदर्शिता को उजागर किया।

22 अगस्त को साइबर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर जिला पुलिस कप्तान ने साइबर अपराधों के खिलाफ जागरूकता अभियान की शुरुआत की थी। उसी दिन तारा चौकी में फुटबॉल मैच का आयोजन कर “नवजीवन” अभियान के तहत युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया गया। विजेता और उपविजेता टीमों को पुरस्कृत कर उन्होंने युवाओं का मनोबल बढ़ाया। 1 से 22 अगस्त तक 20,000 से अधिक वाहनों की जांच में 200 नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और 19 लाख रुपये का चालान उनकी सड़क सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

29 अगस्त को साधुराम विद्या मंदिर स्कूल में साइबर कॉप जागरूकता अभियान में श्री ठाकुर ने स्कूली बच्चों को साइबर ठगी से बचने के तरीके सिखाए। उनकी यह पहल “साइबर अपराध से सुरक्षित रहना है तो हर डिजिटल व्यवहार में समझदारी और सतर्कता अपनानी होगी” समाज को जागरूक करने का एक प्रभावी संदेश था।

30 अगस्त को एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने चांदनी थाने का औचक निरीक्षण किया और रात्रि गश्त की जांच की। जवानों को सतर्क रहने, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे, और महिलाओं व कमजोर वर्गों की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। नवा टोला चेक पोस्ट के निरीक्षण में उन्होंने तस्करी पर कड़ी नजर रखने की हिदायत दी। उसी दिन राष्ट्रीय खेल दिवस पर जरही स्टेडियम में 500 मीटर मैराथन दौड़ का आयोजन हुआ, जिसमे श्री ठाकुर ने स्वयं दौड़ में हिस्सा लेकर युवाओं को प्रेरित किया और साइबर सुरक्षा और नशे से बचाव का संदेश दिया।

सूरजपुर में दर्ज एक गंभीर मामले में पटना से आरोपी की गिरफ्तारी और साक्ष्य जब्ती ने श्री ठाकुर के नेतृत्व में तकनीकी और अंतरराज्यीय समन्वय की क्षमता को दर्शाया। जवानों के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी उल्लेखनीय रही। चांदनी थाने में जवानों की रहन-सहन की सुविधाओं की जांच और जरूरी निर्माण के प्रस्ताव भेजने के निर्देश उनकी संवेदनशीलता को रेखांकित करते हैं।

सूरजपुर एक मध्यम छोटा सा शहर है। लेकिन जिले की भौगोलिक विविधता की वजह से यहां पुलिसिंग कठिन भी है। प्रशांत कुमार ठाकुर के नेतृत्व में पुलिसिंग का आदर्श केंद्र बन गया है। उनकी कार्यशैली मैदानी सक्रियता, तकनीकी नवाचार, सामुदायिक जुड़ाव और जवानों के कल्याण का मेल बड़े शहरों की पुलिसिंग के लिए भी प्रासंगिक है। सीमावर्ती चुनौतियों से निपटने का अनुभव, डिजिटल समन और साइबर जागरूकता जैसे कदम उन्हें ऐसे कप्तान बनाते हैं, जो अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं। अगस्त 2025 में सूरजपुर पुलिस ने अपराध नियंत्रण के साथ-साथ समाज में विश्वास और सुरक्षा की नींव रखी। उनकी शैली उस दीपक की तरह है, जो अंधेरा मिटाता है। कठोरता और संवेदनशीलता का संगम, जो समय की मांग है। सूरजपुर ने देखा कि पुलिस सिर्फ वर्दी नहीं, जनता का भरोसा है। यह तस्वीर सूरजपुर का गर्व है और भविष्य में बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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