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Budget 2026 Impact on Gold Silver- क्या कस्टम ड्यूटी में कटौती से सस्ता होगा सोना? जानें पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड और ग्लोबल मार्केट का नया इशारा

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है। शुक्रवार को भले ही इनकी कीमतों में कुछ करेक्शन नजर आया हो, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान इनके दाम लगातार नई ऊंचाइयां छूते रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के मन में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आने वाले बजट का सोने और चांदी की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?

Budget 2026 Impact on Gold Silver/बजट 2026 की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और इस बार निवेशकों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी सराफा बाजार पर टिकी हैं। पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी की कीमतों ने जिस तरह रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छुआ है, उसने सुरक्षित निवेश की इस चमक को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, शुक्रवार को कीमतों में हल्का सुधार (करेक्शन) देखने को मिला, लेकिन लंबी अवधि में तेजी का रुख बरकरार है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बजट में कस्टम ड्यूटी (आयात शुल्क) में कटौती कर आम आदमी को राहत देंगी? और क्या ऐसी किसी कटौती से घरेलू बाजार में सोना-चांदी वाकई सस्ते होंगे?

भारत अपनी सोने की अधिकांश जरूरतों को आयात के जरिए पूरा करता है, क्योंकि देश में घरेलू उत्पादन बेहद सीमित है। यही वजह है कि सरकार द्वारा लगाई जाने वाली कस्टम ड्यूटी कीमतों को तय करने में अहम भूमिका निभाती है। जब सरकार आयात शुल्क बढ़ाती है, तो सोने की लागत बढ़ जाती है, जिससे गहने और सिक्के महंगे हो जाते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में दिवाली से ठीक पहले देश का गोल्ड इंपोर्ट 14.72 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया था, जो देश की भारी मांग को दर्शाता है। सरल शब्दों में कहें तो कस्टम ड्यूटी में कमी का मतलब है कीमतों में गिरावट की संभावना, लेकिन यह गणित उतना सीधा नहीं है जितना नजर आता है।

पिछले पांच वर्षों के बजट फैसलों पर नजर डालें तो सरकार का रुख काफी बदलता रहा है। साल 2021 में सरकार ने सोने-चांदी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 12.5% से घटाकर 7.5% कर दिया था, ताकि तस्करी पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि, 2023 के बजट में चांदी पर ड्यूटी बढ़ाकर उसे सोने और प्लैटिनम के बराबर लाया गया।

सबसे बड़ा बदलाव बजट 2024 में दिखा, जब स्मगलिंग रोकने के लिए सोने-चांदी पर कुल प्रभावी ड्यूटी घटाकर महज 6% कर दी गई। बजट 2025 में इस मोर्चे पर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, लेकिन अब बजट 2026 से एक बार फिर राहत की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बजट 2026 में सरकार कस्टम ड्यूटी कम करती है, तो भारतीय बाजार में कीमतों में फौरन गिरावट आ सकती है।

लेकिन यह राहत शायद लंबे समय तक न टिके। इसकी वजह यह है कि भारत में सोने-चांदी के दाम घरेलू टैक्स पॉलिसी से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय बाजार के समीकरणों और भू-राजनीतिक (Geopolitical) हालातों से तय होते हैं। वर्तमान में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की सुगबुगाहट, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, और यूरोपीय यूनियन के नए टैरिफ जैसे कारकों ने वैश्विक स्तर पर सोने को एक ‘सुरक्षित ठिकाने’ के रूप में स्थापित कर दिया है। जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक डॉलर या शेयर बाजार के बजाय सोने में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित समझते हैं, जिससे कीमतें ऊपर जाती हैं।

कुल मिलाकर, बजट 2026 में कस्टम ड्यूटी में कटौती सोने और चांदी की कीमतों को एक तात्कालिक ‘ब्रेक’ तो दे सकती है, लेकिन वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका और विदेशी मुद्राओं में कमजोरी जैसे अंतरराष्ट्रीय कारण इनकी चमक को भविष्य में और बढ़ा सकते हैं। ऐसे में मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों के लिए यह बजट केवल टैक्स की दरों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी बचत और निवेश के भविष्य को भी तय करेगा।

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