BJP ने बदली संगठन की तस्वीर, नितिन नबीन की ताजपोशी से कांग्रेस के नेतृत्व मॉडल पर फिर छिड़ी बहस

दिल्ली।लंबे समय से नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तलाश कर रही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने 14 दिसंबर को बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए बिहार सरकार में मंत्री और चार बार विधायक नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया।
इस घोषणा के साथ ही न सिर्फ बीजेपी के भीतर नई ऊर्जा का संदेश गया, बल्कि देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस में भी नेतृत्व चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर दोनों दल अपने शीर्ष नेतृत्व का चयन किस तरह करते रहे हैं।
नितिन नबीन की इस नियुक्ति को कई राजनीतिक विश्लेषक जगत प्रकाश नड्डा के बाद संभावित पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं।
पार्टी की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने नितिन नबीन की संगठनात्मक क्षमता और जमीनी अनुभव की सराहना की।
इसके साथ ही 1980 में स्थापित बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्षों की सूची में उनका नाम भी जुड़ गया है।
चार दशकों के अपने राजनीतिक सफर में बीजेपी ने संगठन की कमान समय-समय पर अलग-अलग नेताओं को सौंपी है और अहम राजनीतिक दौर से पहले नेतृत्व में बदलाव कर चौंकाने वाले फैसले भी किए हैं।
पार्टी अब तक 12 राष्ट्रीय अध्यक्ष बना चुकी है, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, के जना कृष्णमूर्ति, एम वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जगत प्रकाश नड्डा जैसे दिग्गज शामिल रहे हैं।
लालकृष्ण आडवाणी तीन अलग-अलग कार्यकालों में अध्यक्ष रहे और सबसे लंबे समय तक इस पद पर बने रहने वाले नेता रहे, जबकि अमित शाह के कार्यकाल में पार्टी ने अपने सबसे मजबूत चुनावी दौर को देखा।
अब नितिन नबीन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद यह अटकलें तेज हैं कि उन्हें जल्द ही पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकती है। माना जा रहा है कि खरमास के बाद इस दिशा में अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
बीजेपी के इस सक्रिय और अपेक्षाकृत तेज नेतृत्व परिवर्तन के उलट कांग्रेस का इतिहास काफी अलग रहा है। 1885 में स्थापित कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व में तुलनात्मक रूप से कम बदलाव हुए हैं। 1980 के बाद पार्टी की कमान लंबे समय तक नेहरू-गांधी परिवार के पास केंद्रित रही।
पट्टाभि सीतारमैया, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पीवी नरसिम्हा राव जैसे नाम कांग्रेस अध्यक्षों की सूची में दर्ज हैं, लेकिन सबसे लंबा कार्यकाल सोनिया गांधी के नाम रहा, जिन्होंने 1998 से 2017 तक और फिर 2019 से 2022 तक पार्टी का नेतृत्व किया।
सोनिया गांधी के बाद उनके बेटे राहुल गांधी ने कुछ समय के लिए अध्यक्ष पद संभाला, लेकिन 2022 में कांग्रेस ने 24 साल बाद गांधी परिवार से बाहर अध्यक्ष चुना।
संगठनात्मक चुनाव के जरिए मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी अध्यक्ष बने और उन्होंने शशि थरूर को हराकर यह जिम्मेदारी संभाली।
बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व मॉडल में सबसे बड़ा फर्क पारिवारिक राजनीति को लेकर नजर आता है। बीजेपी में संगठनात्मक निर्णय और नेतृत्व परिवर्तन अपेक्षाकृत खुले और समयबद्ध रहे हैं, जबकि कांग्रेस में लंबे समय तक सत्ता एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है।
अब जब नितिन नबीन के रूप में बीजेपी ने संगठन को नई दिशा देने का संकेत दिया है, तो राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यकाल के बाद कांग्रेस किस तरह और किस चेहरे को अगला अध्यक्ष चुनेगी।





