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ACB action in Jal Jeevan Mission- जल जीवन मिशन घोटाला: राजस्थान से दिल्ली तक ACB का एक्शन; रिटायर्ड IAS के 9 करीबियों पर कसा शिकंजा, 15 ठिकानों पर छापेमारी

ACB action in Jal Jeevan Mission/जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार तड़के एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हड़कंप मचा दिया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एसीबी की टीमों ने राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, सीकर और जालोर के साथ-साथ दिल्ली, बिहार और झारखंड सहित कुल 15 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। इस सघन अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने करीब 9 संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जिनसे गुप्त स्थानों पर गहन पूछताछ की जा रही है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य केंद्र पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल से जुड़े संभावित कड़ी और उनके करीबी रहे हैं।

ACB action in Jal Jeevan Mission/यह बड़ी कार्रवाई जेजेएम एसीबी एसआईटी (SIT) के अध्यक्ष और एसपी पुष्पेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में अंजाम दी गई है। हिरासत में लिए गए लोगों में केडी गुप्ता, सुशील शर्मा, डीके गौड़, महेंद्र सोनी, विशाल सक्सेना, दिनेश गोयल, शुभांशु दीक्षित, अरुण श्रीवास्तव और निरिल कुमार शामिल हैं।

एसीबी को संदेह है कि करोड़ों रुपये के इस कथित फर्जीवाड़े के तार उच्च प्रशासनिक स्तर तक फैले हुए हैं। जांच टीमें अब हिरासत में लिए गए लोगों के बैंक खातों, संपत्तियों के दस्तावेजों और डिजिटल ट्रांजेक्शन को बारीकी से खंगाल रही हैं, जिससे इस घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

मामले की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एसीबी ने पहले ही जलदाय विभाग (PHED) के तीन बड़े अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।ACB action in Jal Jeevan Mission

आरोप है कि इन अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच के घेरे में तत्कालीन मुख्य अभियंता दिनेश गोयल, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी और अधिशासी अभियंता सिद्धार्थ टांक जैसे अधिकारी हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई है।

दरअसल, ‘हर घर जल योजना’ के तहत ग्रामीण इलाकों में नल कनेक्शन देने के नाम पर 900 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की बात सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि ठेकेदारों ने पीएचईडी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों (Fake Experience Certificates) के आधार पर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए थे। इतना ही नहीं, योजना के क्रियान्वयन में बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और चौंकाने वाली बात यह है कि कई क्षेत्रों में बिना कोई काम किए ही कागजों पर फर्जी प्रगति दिखाकर करोड़ों का भुगतान उठा लिया गया। एसीबी की इस ताजा छापेमारी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है

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