NCTE TET Order 2026: 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्यता का विरोध, शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
राजस्थान के डूंगरपुर जिले सहित पूरे प्रदेश के शिक्षकों में नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के एक नए आदेश को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अब शिक्षक संघों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

NCTE TET Order 2026/डूंगरपुर: राजस्थान शिक्षक संघ (लोकतांत्रिक) ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा जारी उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है।
संगठन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस ‘अन्यायपूर्ण’ आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
NCTE TET Order 2026/मामला 23 सितंबर 2025 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक निर्णय और उसके बाद एनसीटीई द्वारा जारी निर्देशों से जुड़ा है। इस आदेश के तहत शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 की धारा 23(1) का हवाला देते हुए कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले उन सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दी गई है, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी।
इतना ही नहीं, जो शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं करेंगे, उन्हें पदोन्नति (Promotion) और सेवा के लिए अयोग्य माना जाएगा।
शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाषचंद्र भट्ट और जिला अध्यक्ष हरिओम पंचाल ने कहा कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक पहले ही कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं और साक्षात्कार के माध्यम से चयनित हुए थे।
इन शिक्षकों ने डीएलएड (D.El.Ed) और बीएड (B.Ed) जैसे सभी मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण पूर्ण किए हैं और वे पिछले 15-20 वर्षों से सफलतापूर्वक सेवाएं दे रहे हैं।
संगठन का कहना है कि वर्षों की सेवा के बाद अब पात्रता परीक्षा थोपना शिक्षकों के मनोबल को तोड़ने वाला और उनकी सेवा सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। यह ‘प्राकृतिक न्याय’ के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है।
शिक्षकों का तर्क है कि जब पात्रता परीक्षा का नियम ही 2011 के बाद प्रभावी हुआ था, तो उसे ‘बैक डेट’ से पुराने शिक्षकों पर लागू करना तर्कसंगत नहीं है। इस आदेश से राजस्थान सहित देशभर के लाखों वरिष्ठ शिक्षकों की पदोन्नति रुक सकती है और उनकी नौकरी पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं।
शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार कर इसे वापस नहीं लिया, तो शिक्षक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए विवश होंगे। शिक्षकों का मानना है कि अनुभव को पात्रता परीक्षा के तराजू में तौलना शिक्षा व्यवस्था के लिए भी हितकारी नहीं है।NCTE TET Order 2026




