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Chandra Grahan का धार्मिक प्रभाव: अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों के बदले समय; जानें कब खुलेंगे रामलला और बाबा विश्वनाथ के कपाट

मंगलवार को साल के पहले चंद्र ग्रहण और 'सूतक काल' के साये ने उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध धर्मस्थलों की दिनचर्या बदल दी। अयोध्या से लेकर काशी और मथुरा तक, प्रमुख मंदिरों के कपाट नियत समय से पहले बंद कर दिए गए, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए संशोधित समय-सारणी का पालन करना पड़ा।

Chandra Grahan/लखनऊ/वाराणसी: मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर लगने वाले चंद्र ग्रहण ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के धार्मिक अनुष्ठानों और दर्शन के समय को प्रभावित किया है।

भारत में दिखाई देने वाले इस Chandra Grahan  का असर अपराह्न 03:27 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से 9 घंटे पहले लगने वाले ‘सूतक काल’ के कारण अयोध्या के राम मंदिर और वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित प्रदेश के कई बड़े मंदिरों के कपाट मंगलवार सुबह ही बंद कर दिए गए।

काशी विश्वनाथ में ‘मोक्ष’ के बाद दर्शन

​वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के द्वार तड़के 04:30 बजे ही बंद कर दिए गए। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, Chandra Grahan की अवधि समाप्त होने के बाद शाम 06:47 बजे शुद्धिकरण और ‘मोक्ष’ से जुड़ी विशेष विधियां संपन्न की जाएंगी। भक्तों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन शाम 07:15 बजे से पुनः सुलभ होंगे।

अयोध्या: रामलला की विशेष आरती और दर्शन

​अयोध्या के राम मंदिर में सूतक काल का कड़ा पालन किया गया।

  • सुबह का कार्यक्रम: तड़के 04:30 बजे मंगला आरती और 06:30 बजे श्रृंगार आरती संपन्न हुई। सुबह 08:15 बजे रामलला को ‘बाल भोग’ लगाया गया।
  • द्वार बंदी: सुबह 09:00 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
  • रात्रि दर्शन: ग्रहण के बाद शाम की आरती होगी और रात 08:30 बजे से 11:00 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे।

ब्रजमंडल: द्वारकाधीश मंदिर ने पेश की अलग मिसाल

​मथुरा और वृंदावन के अधिकांश मंदिर जैसे बांके बिहारी और श्री कृष्ण जन्मस्थान सुबह ही बंद कर दिए गए। बांके बिहारी मंदिर सुबह 08:30 बजे बंद हुआ, जो अब शाम 07:00 बजे खुलेगा। हालांकि, ऐतिहासिक द्वारकाधीश मंदिर अपने नियमित समय पर खुला रहा। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, पुष्टिमार्ग परंपरा में भगवान की बाल रूप में सेवा होती है, और मान्यता है कि ग्रहण जैसे कठिन समय में भक्त को अपने आराध्य के साथ रहना चाहिए।

विंध्यवासिनी मंदिर (मिर्जापुर) का समय

​मिर्जापुर के प्रसिद्ध विंध्यवासिनी मंदिर के द्वार अपराह्न 03:15 बजे से रात 08:00 बजे तक बंद रहेंगे। विशेष अनुष्ठान और आरती के बाद ही भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।

भक्तों के लिए अपील

​प्रदेश भर के मंदिर प्रशासनों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ग्रहण काल के दौरान मंदिरों की ओर न आएं और संशोधित समय-सारणी के अनुसार ही अपनी यात्रा का प्रबंधन करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद सभी प्रमुख नदियों और सरोवरों के तट पर गंगा स्नान और शुद्धिकरण की तैयारियां भी की गई हैं।

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