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जशपुर में शिक्षकों की मुलाकात से बढ़ी उम्मीदें, क्या दिलीप सिंह जूदेव की राह पर चलेंगे प्रबल प्रताप…..?

जशपुर(मनीष जायसवाल) । जशपुर पैलेस एक बार फिर शिक्षकों की आवाज का केंद्र बना। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के वार्षिक कैलेंडर विमोचन कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजा प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के बीच सीधी चर्चा का अवसर मिला। जिले भर से आए फेडरेशन पदाधिकारी, ब्लॉक प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिक्षक इस मौके पर मौजूद रहे।

कार्यक्रम एकदम आम जरूर था, लेकिन खास व्यक्तिव के यहां एक आशाओं भरा संवाद हो गया। इस दौरान यहां फेडरेशन के प्रदेश महासचिव टिकेश्वर भोय, जिला अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे। शिक्षकों ने बिना लाग-लपेट अपनी बातें रखीं। सबसे प्रमुख मुद्दा रहा सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति। इसके साथ ही टीईटी से जुड़े सहायक शिक्षक और शिक्षकों के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा साथ ही अन्य लंबित मांगों पर भी विस्तार से बात रखी गई।

शिक्षकों के बीच राजा प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में मोदी की गारंटी के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने का वादा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस विषय को मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर गंभीरता से रखा जाएगा। उनके इस आश्वासन से उपस्थित शिक्षकों के बीच उम्मीद की एक लकीर खिंचती नजर आई।

लेकिन जशपुर में जब शिक्षकों और जशपुर पैलेस का जिक्र आता है, तो स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की याद अपने आप जुड़ जाती है। शिक्षक नेता टिकेश्वर भोय उस दौर को याद करते हुए कहते हैं कि वर्ष 2012 में शिक्षा कर्मियों के संविलियन का मुद्दा जब तेज हुआ था, तब स्व. जूदेव ने इसे प्राथमिकता से लिया था। और शिक्षकों के समर्थन में एक पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के नाम जारी किया था। इसके अलावा उन्होंने डॉ. रमन सिंह से विशेष चर्चा कर शिक्षकों की बात सीधे रखी थी।

उस समय जशपुर के शिक्षकों को यह विश्वास हो गया था कि 2013 विधानसभा चुनाव से पहले संविलियन की दिशा साफ हो जाएगी। शिक्षकों की ओर से इस लड़ाई की कमान स्व. दिलीप सिंह जूदेव ने संभाल ली थी। लेकिन 14 अगस्त 2013 को उनके निधन ने उस उम्मीद को अधूरा छोड़ दिया।

शिक्षकों को लगा कि उनकी आवाज सत्ता और पार्टी के शीर्ष तक पहुंचते-पहुंचते थम गई। शिक्षक नेताओं का कहना है कि उस दौर में समस्याएं केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहती थीं, उन पर आगे बढ़कर बात होती थी। यही कारण है कि आज भी शिक्षक परिवार उस समय को भरोसे और सक्रिय पहल के दौर के रूप में याद करता है।

आज हालात बदल चुके हैं, लेकिन सवाल फिर वही हैं। सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति अब भी समाधान की प्रतीक्षा में है। टीईटी का विषय सिर्फ छत्तीसगढ़ का नहीं, देखा जाए तो देश भर के लाखों सेवारत शिक्षको के भविष्य से जुड़ा हुआ है। न्यायालयीन निर्णयों और नीतिगत उलझनों के बीच यह मुद्दा और जटिल हो चुका है।

ऐसे में सवाल उभरा कर आता है क्या प्रबल प्रताप सिंह जूदेव अपने पिता की तरह शिक्षकों के मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे..? क्या वे वेतन विसंगति और टीईटी जैसे विषयों को प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक ले जाने की पहल करेंगे..?

राजनीति में विरासत नाम से मिल सकती है, लेकिन विश्वास काम से बनता है। शिक्षक वर्ग संगठित है, जागरूक है और अपने हितों को समझता है। जो नेता उनके सवालों को गंभीरता से उठाएगा, वह उनके बीच सिर्फ प्रतिनिधि नहीं वह भरोसे का चेहरा भी बनेगा।

इस मुलाकात कार्यक्रम के अंत में फेडरेशन ने आभार व्यक्त किया, लेकिन अब असली कसौटी आगे है। जशपुर के अलावा प्रदेश के शिक्षक इंतजार में हैं आश्वासन को पहल में बदलते देखने के लिए।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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