जंगल में मिली लाश ने उधेड़ा घर का खूनी सच— ससुर की हत्या में दामाद और साढ़ू गिरफ्तार
गुमशुदगी का नाटक, जंगल में हत्या—दामाद ने खुद रचा जांच का जाल

बालाघाट…थाना परसवाड़ा क्षेत्र के ग्राम अरंडिया जंगल में मिले 60 वर्षीय बुजुर्ग के शव की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने एक अंधे हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि यह हत्या किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि मृतक के अपने ही परिवार से जुड़े लोगों ने की थी। पुराने पारिवारिक विवाद की आग में झुलस रहे दामाद और उसके साढ़ू ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार 3 फरवरी को अरंडिया के जंगल क्षेत्र में एक वृद्ध का शव मिलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी परसवाड़ा पुलिस बल, फोरेंसिक टीम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों के साथ मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक जांच के बाद मर्ग कायम कर मामले की तह तक जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। मृतक की पहचान कैलाश गिरी गोस्वामी (60 वर्ष), निवासी नेवरगांव नगाटोला, थाना वारासिवनी के रूप में हुई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि बुजुर्ग की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर विवेचना तेज की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मृतक का अपने दामाद अशोक गिरी और उसके साढ़ू रुस्तम गिरी से लंबे समय से विवाद चल रहा था। 30 जनवरी की शाम दोनों आरोपियों ने कैलाश गिरी को शराब पिलाने के बहाने मोटरसाइकिल से अरंडिया के जंगल की ओर ले गए। सुनसान स्थान पाकर उन्होंने उस पर हमला किया और बाद में शव को घसीटकर जंगल के भीतर फेंक दिया, ताकि पहचान और सबूत छुपाए जा सकें।
मामले को और पेचीदा बनाने के लिए आरोपी अशोक गिरी ने हत्या के बाद खुद ही थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई और जांच के दौरान खुद को सहयोगी दिखाता रहा। लेकिन पुलिस को उसके व्यवहार और बयान में लगातार विरोधाभास नजर आया। संदेह गहराने पर जब दोनों आरोपियों से कड़ी पूछताछ की गई, तो वे टूट गए और अपराध स्वीकार कर लिया।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी ने मृतक का झोला और अन्य सामान अपने पिता की समाधि के पास ले जाकर जला दिया, जिसे वह निजी बदले की कार्रवाई मान रहा था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक रंजिश जब कानून से ऊपर रख दी जाती है, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।





