11 साल बाद बेनकाब हुआ मनरेगा महाघोटाला…फर्जी बिल, कूटरचित दस्तावेज और 30 लाख का गबन—फरार सीईओ आखिरकार गिरफ्तार
जिस योजना से मजदूरों को मिलना था काम, उसी से अफसरों ने बना लिया खजाना

बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)..वित्तीय वर्ष 2014-15 में जनपद पंचायत वाड्रफनगर क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में मुरुम मिट्टी, सड़क, पुलिया, तटबंध और डब्लूबीएम निर्माण के नाम पर फर्जी बिल व कूटरचित दस्तावेजों से 30 लाख रुपये से अधिक की शासकीय राशि के गबन के मामले में वर्षों से फरार चल रहे तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
चार ग्राम पंचायतों में हुआ फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार, ग्राम पंचायत तुगंवा, गुडरू, जमई और पेण्डारी में निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिल लगाकर शासकीय धन का दुरुपयोग किया गया। इस मामले में जनपद पंचायत वाड्रफनगर द्वारा 30 अप्रैल 2020 को जांच प्रतिवेदन और दस्तावेज थाना बसंतपुर, चौकी वाड्रफनगर में प्रस्तुत किए गए थे।
2020 में दर्ज हुआ अपराध, कई गिरफ्तार
जांच प्रतिवेदन के आधार पर वर्ष 2020 में कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा अश्विनी कुमार तिवारी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई। विवेचना के दौरान अश्विनी कुमार तिवारी सहित सप्लायर हरिहर यादव, कुजलाल साहू और रोजगार सहायक गिरीश यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है।
धारा 164 के बयान, पूरक चालान पेश
विवेचना के दौरान पुलिस अनुविभागीय अधिकारी वाड्रफनगर द्वारा जनपद पंचायत के कर्मचारियों और सप्लायरों के धारा 164 दंप्रसं के तहत कथन न्यायालय में दर्ज कराए गए। इसके बाद आरोपियों के विरुद्ध पूरक चालान प्रस्तुत किया गया।
30 लाख से अधिक के गबन की स्वीकारोक्ति
पूछताछ में आरोपी अश्विनी कुमार तिवारी ने एस. के. मरकाम और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर 30,02,449 रुपये की शासकीय राशि के गबन की बात स्वीकार की। इसी खुलासे के बाद वर्षों से फरार तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रवण कुमार मरकाम उर्फ एस.के. मरकाम को हिरासत में लिया गया।
जुर्म कबूल, न्यायिक रिमांड
पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और विवेचना चल रही है।




