कानून से ऊपर सिस्टम? सुप्रीम कोर्ट की राहत के बाद भी कप्तान के निर्देश पर पुलिस कार्रवाई का दावा
न्यायालय की रोक, फिर भी पुलिस सक्रिय! कप्तान तक पहुंचा आदेश उल्लंघन का मामला

मुंगेली.. जिले से कानून के शासन पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने न सिर्फ कार्रवाई जारी रखी, बल्कि रात के समय याचिकाकर्ता के घर में घुसकर तलाशी भी ली।
याचिकाकर्ता योगेंद्र शर्मा का कहना है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश देते हुए अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट बताए जा रहे हैं।
अंतरिम राहत के बाद भी घर में तलाशी
आरोप के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद 8 फरवरी की रात फास्टरपुर थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ याचिकाकर्ता के घर पहुंचे और तलाशी ली। इस दौरान घर में मौजूद वृद्ध माता-पिता और परिजनों को मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
‘एसपी के निर्देश’ का हवाला
जब याचिकाकर्ता ने रात में की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाए और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति दिखाई, तो थाना प्रभारी ने कथित तौर पर यह कहकर कार्रवाई को सही ठहराया कि यह सब वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची शिकायत
इस पूरे घटनाक्रम के बाद याचिकाकर्ता ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में आदेशों की अवहेलना की शिकायत दर्ज करा दी है। बताया गया है कि अगली सुनवाई में इस मुद्दे को विशेष रूप से अदालत के संज्ञान में लाया जाएगा। मामले की अगली तारीख 6 अप्रैल 2026 तय है।
कानून बनाम ज़मीनी हकीकत
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत भर नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश भी स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू हो पा रहे हैं? यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न्यायिक गरिमा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।




