सत्ता ने संगम पर पहरा लगाया, संतों पर लाठियां चलाईं: शंकराचार्य रोके गए, बटुकों की चोटी खिंची — बेलतरा से BJP के ‘सनातन प्रेम’ पर कांग्रेस का सीधा हमला
सनातन पर लाठी, आस्था पर पहरा: संगम में शंकराचार्य अपमान के खिलाफ बेलतरा से BJP को खुली चुनौती

बिलासपुर…प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को संगम स्नान से रोके जाने, साधु-संतों के साथ मारपीट और बटुकों की चोटी खींचे जाने की घटना ने भाजपा सरकार के तथाकथित सनातन प्रेम की परतें उधेड़ दी हैं। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को सत्ता के नशे में चूर सरकार द्वारा अंजाम दी गई दमनकारी और अहंकारी कार्रवाई बताते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुला हमला करार दिया है।
इसी आक्रोश के बीच बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चिंगराजपारा स्थित शंकर मंदिर में कांग्रेस नेता, जिला कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ में मनरेगा समन्वयक विजय केसरवानी के नेतृत्व में सुंदरकांड का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूजा से ज्यादा एक राजनीतिक प्रतिरोध के रूप में सामने आया, जिसमें भाजपा सरकार की कथित तानाशाही, द्वेषपूर्ण सोच और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ खुला संदेश दिया गया।
विजय केसरवानी ने कहा कि जिस सरकार के नेता हर मंच से खुद को सनातन संस्कृति का ठेकेदार बताते नहीं थकते, उसी सरकार के संरक्षण में प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थस्थल पर शंकराचार्य को संगम स्नान से रोका गया। उन्होंने आरोप लगाया कि साधु-संतों पर हाथ उठाना और बटुकों की चोटी खींचना कोई कानून-व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता के इशारे पर किया गया धार्मिक अपमान है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अब धर्म की रक्षक नहीं, बल्कि धर्म को नियंत्रित करने वाली सत्ता बन चुकी है। विजय केसरवानी ने तीखे शब्दों में कहा कि जब सत्ता को आस्था से डर लगने लगे, तब लाठियां चलती हैं और चोटी खींची जाती है। यह घटना बताती है कि भाजपा का सनातन प्रेम चुनावी नारों तक सीमित है, जमीन पर उसकी असली शक्ल दमन और अहंकार की है।
विजय केसरवानी ने कहा कि संत समाज भारत की आत्मा है और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना पूरे देश की सांस्कृतिक चेतना को चोट पहुंचाने जैसा है। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस इस अपमान को न भूलेगी और न माफ करेगी। यदि आज शंकराचार्य को रोका जा सकता है, तो कल आम श्रद्धालु की आस्था भी सत्ता के दरवाजे पर रोकी जाएगी।
उन्होंने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रयागराज माघ मेले की इस घटना की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, दोषी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई और शंकराचार्य तथा संत समाज से सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से सदन तक ले जाएगी।
सुंदरकांड के माध्यम से बेलतरा से यह संदेश दिया गया कि आस्था पर पहरा और संतों पर लाठी कांग्रेस को स्वीकार नहीं है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार के खिलाफ खुला राजनीतिक ऐलान था।बेलतरा से BJP के ‘सनातन प्रेम’ पर कांग्रेस का सीधा हमला





