परिसीमन का इंतज़ार… इसके बाद बदल जाएगी छत्तीसगढ़ की राजनीतिक तस्वीर

सूरजपुर (मनीष जायसवाल) ।भारत में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कानून पारित हुए एक वर्ष से अधिक हो चुका है। इसे भारतीय राजनीति की सामाजिक संरचना में सबसे बड़े संवैधानिक बदलावों में से एक माना जा रहा है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यह तब तक लागू नहीं हो सकता जब तक नई जनगणना पूरी न हो जाए और उसके आधार पर परिसीमन प्रक्रिया आगे न बढ़े..। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि महिला आरक्षण कब लागू होगा और क्या 2028 का विधानसभा चुनाव इसके दायरे में आएगा। इसका उत्तर संविधान और परिसीमन की समय सीमा में छिपा हुआ है..।
केंद्र सरकार ने 2024 में जनगणना प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया था और उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार 2026 तक अधिकांश गणना पूरी हो जाएगी, जबकि 2027 में अंतिम रिपोर्ट प्रकाशित होगी। महिला आरक्षण कानून में साफ लिखा है कि यह प्रावधान तभी लागू होगा जब जनगणना के अंतिम आंकड़े उपलब्ध हों और उन्हीं आंकड़ों के आधार पर सीटों की नई संरचना तैयार की जाए। इसका सीधा अर्थ है कि जब तक फाइनल जनगणना रिपोर्ट नहीं आती, तब तक परिसीमन आयोग का गठन ही संभव नहीं है और आयोग के बिना महिला आरक्षण लागू करना संवैधानिक रूप से असंभव है।
परिसीमन आयोग का काम काफी व्यापक माना जाता है। यह केवल विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदलने की औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक भूगोल का नया स्वरूप तैयार करने जैसा है..। आयोग जनसंख्या, भौगोलिक वितरण, ST–SC अनुपात, शहरीकरण, महिलाओं की आबादी और इलाके वार जनसंख्या असंतुलन जैसे कारकों का अध्ययन करता है। इसी आधार पर सीटों की सीमाएं दोबारा निर्धारित की जाती हैं और SC–ST सीटों का नया आवंटन तय होता है। पिछले परिसीमन के अनुभव बताते हैं कि आयोग को अपना कार्य पूरा करने में 18 से 30 महीने का समय लगता है।
छत्तीसगढ़ की स्थिति देखने पर तस्वीर बिल्कुल साफ दिखती है। राज्य में अगला विधानसभा चुनाव नवंबर-दिसंबर 2028 में होना तय है, लेकिन जनगणना के अंतिम परिणाम 2027-28 से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है..। ऐसे में परिसीमन आयोग अधिकतम 2028 में ही गठित हो पाएगा। आयोग का विस्तृत काम देखते हुए 2029-30 से पहले परिसीमन पूरा होना मुमकिन नहीं लगता। इस परिस्थिति में 2028 का चुनाव मौजूदा 90 सीटों पर, वर्तमान SC–ST आरक्षण व्यवस्था के साथ और बिना महिला आरक्षण के ही होना तय लगता है..।
राजनीतिक गलियारों में कुछ समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अगला चुनाव नई सीमाओं और परिसीमन के आधार पर होगा। कई दावेदार इसी संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने क्षेत्रों में नई रणनीतियां बना रहे थे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 2028 तक परिसीमन पूरा होना तो दूर, उसकी प्रक्रिया शुरू होना भी मुश्किल लगता है..। इसलिए संभावित दावेदारों को आगामी चुनाव में पुरानी सीटों पर ही दांव लगाना राजनीतिक रूप से ज्यादा व्यावहारिक माना जा रहा है..।
जहां तक महिला आरक्षण के वास्तविक लागू होने का सवाल है, उपलब्ध समय सीमा के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है कि जनगणना की अंतिम रिपोर्ट 2027- 28 के बीच आएगी, परिसीमन आयोग 2028 में गठित होगा और 2029-30 के बीच अपना कार्य पूरा करेगा..। इस आधार पर छत्तीसगढ़ में महिला आरक्षण का प्रभाव 2031-32 के विधानसभा चुनाव में दिखाई देगा, जबकि लोकसभा में यह परिवर्तन संभवतः 2034 के आम चुनाव से पहले प्रभावी हो सकेगा..।
परिसीमन के बाद राज्य की राजनीति में बड़े स्तर पर बदलाव होने की संभावना है। करीब 30 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं, जिसमें 12-15 सीटें आदिवासी इलाकों में और 5-6 सीटें SC बहुल क्षेत्रों में पड़ सकती है । शहरी विस्तार वाले रायपुर, दुर्ग, भिलाई और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात के आधार पर सीटें नई तरह से आकार ले सकती हैं। इससे राजनीतिक दलों को नए चेहरे, नई गणना और नई रणनीतियों पर काम करना ही होगा..।





