editorial

“मै गलत हूं या रास्ता…? क्यों जनमानस को अपनी मुहिम से नहीं जोड़ पा रहे राहुल गांधी..?- दीपक पाण्डेय

न वोट मिलता है

न मै रूकता हूं

पता नही रास्ता

गलत है

या  मैं ….?

क्यों जनता को कोई मुद्दा भावनात्मक रूप से जोड़ नही पाता ? चाहे राफेल हो, भारत जोडो यात्रा या न्याया यात्रा, ई वी एम हैक, और अभी ज्वलंत मुद्दा वोट चोरी का देश मे क्यों वोट चोरी मुद्दा क्लिक नहीं हो पा रहा है। क्यों लोग वोट चोरी के मुद्दे को अपने  से नहीं जोड़ पा रहे हैं। इसका अर्थ है आप में सत्यता का अभाव और जनता के रोजमर्रे से कोई संबंध ना होना और आज के समय पूरा देश डिजिटल में ऑनलाइन हो गया है ।आप कहीं भी सुदूर ग्रामीण क्षेत्र मैं भी आप अपना नाम के साथ मतदाता सूची  चेक कर सकते हैं नाम है या नहीं ..। तब यह बातें करना और इसे देश का मुद्दा बनाना आपकी मानसिक दिवालियापन का ही परिचायक है। यह वोट चोरी जन जन से संबधित न होने के कारण जब कोई मुद्दा भावनात्मक रूप से मतदाता को जोड़ने में असफल रहता है तो उसमें कभी सफलता नहीं मिलती।

समय-समय पर देश में रक्तहीन क्रांति हुई और कश्मीर से कन्याकुमारी  दिल्ली से आबुझमाड तक मतदाता का जुड़ाव रहा और उसे मुद्दे के आधार पर मतदाता ने अपना वोट का प्रयोग किया। जैसे 1971 में स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा किए गए बैंक राष्ट्रीयकरण गरीबी हटाओ और बांग्लादेश का निर्माण देश के लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ा और ऐतिहासिक सफलता कांग्रेस पार्टी को मिली। ऐसे ही 1977 में आपातकाल के बाद होने वाले चुनाव में हलधर किसान जो एक नया चुनाव चिन्ह था ,बिना किसी प्रचार के भारी बहुमत से जनता पार्टी की सरकार बनी । आपातकाल भावनात्मक मुद्दा के साथ दमन और अत्याचार का विषय भी बन गया था । फिर एक दौर आया 1984 में स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या, जो पूरे देश को विचलित कर गई और देश ने एकमत से कांग्रेस पार्टी को दो तिहाई बहुमत से सत्ता में लाया ।

1989 बोफोर्स मुद्दा देश के सेना से संबंधित था । उसमें भ्रष्टाचार होने के कारण भावनात्मक रूप से पूरा देश जुड़ गया । भारत के पूर्व स्वर्गीय प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी ने 1989 के चुनाव के संदर्भ में अपनी पुस्तक ‘जीवन जो जिया” में लिखा  है निसंदेह विश्वनाथ प्रताप सिंह ने त्यागपत्र देकर बोफर्स के मुद्दे को पूरे देश में भावनात्मक मुद्दा बना दिया और वही सफलता का कारण बना ।जब भारतीय जनता पार्टी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट सम्मिलित पार्टी की सरकार को बाहर से समर्थन दी और उस समय के हीरो स्वर्गीय बीपी सिंह प्रधानमंत्री बने ।स्वर्गीय वाजपेई जी की सरकार बाबरी मस्जिद के पतन के बाद 1998 से 2004 तक इसके पूर्व भी तेरह दिन के लिए प्रधानमंत्री बने थे ।उस समय राम मंदिर मुद्दा था  ।भावनात्मक रूप से 2014 भ्रष्टाचार का मुद्दा नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन किया और निरंतर देश का नेतृत्व कर रहे हैं । ऐसा कोई विषय हो तो परिवर्तन होता है ।

ये देश का इतिहास हमें बताता हैं। सबसे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस देश में होने के कारण उनके नेता राहुल गांधी जी के द्वारा सत्तारूढ़ पार्टी के विरुद्ध में समय-समय पर अनेक विषय को लेकर पूरे देश में एक अभियान आंदोलन चलाया गया है ।परंतु उस अभियान की सफलता नगण्य है। इसका बड़ा कारण कांग्रेस का लगातार असफल होना और क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव में लगातार वृद्धि….. इसलिए कांग्रेस के नेतृत्व में चलाया जा रहा कोई भी अभियान आम जन मानस को उद्वेलित नहीं कर पा रहा है । ना भावनात्मक रूप से आम जनमानस उससे जुड़ पा रहा है । इसका प्रमुख कारण है नेतृत्व में दृढ़ता की कमी , लक्ष्य हीनता, गलत रणनीतियां और अपरिपक्व सलाहकार, मुद्दे पर रिसर्च और मेरिट में न होना, चाहे चीन के संदर्भ में 24000 हजार किलोमीटर कब्जा का हो , गलवान में 25 भारतीय सेना के शहीद होने का विषय हो यह कहना कि सेना सीमा पर बिना बंदुक गोली के थी ।जबकि यह एक समझौते के तहत था। जो कांग्रेस के शासनकाल मे चीन के साथ  किया गया था ।

फिर राफेल का  मुद्दा चौकीदार चोर है भी प्रमाण के अभाव मे बोफोर्स नही बन पाया । विविधता में एकता भारत की विशेषता है । भारत जोड़ो यात्रा भी लोगों को कांग्रेस से नहीं जोड़ पाई। फिर न्याय यात्रा में भी पार्टी को न्याय नहीं मिला पाया। अभी वोट चोरी का मुद्दा जब अपने यौवन पर था तभी सीएस़ीएस  के संजय कुमार ने 17 अगस्त को ट्वीट कर गलत जानकारी के लिए माफी मांगी  ।17 अगस्त से राहुल और तेजस्वी की वोट चोरी यात्रा बिहार में प्रारंभ हुई  । साथ ही जिन भी मतदाता के बारे में आरोप लगाया गया था कर्नाटक के इन्होंने दो बार मतदान किया है वह बात भी गलत साबित हो गई। कर्नाटक के वरिष्ठ सहकारिता मंत्री श्री के एन  राजन्ना द्वारा यह स्वीकार किया गया लोकसभा के पूर्व मतदाता सूची बनाने का कार्य कांग्रेस की राज्य सरकार ने किया है । इसलिए ये असत्य है । चुनाव आयोग का इसमें कोई भी रोल नहीं है ना कोई पक्षपात पूर्ण कार्यवाही हुई है । इसकी सजा उस मंत्री को बर्खास्त कर दिया गया । जब ऐसी बातें आंदोलनरत पार्टी  और नेतृत्व के विरुद्ध आती है तब सत्तारुढ़ पार्टी का प्रचार तुरंत निसंदेह उसे आमजन मानस तक पहुंचने में कोई कसर नहीं रखता ।

बिहार में वोट चोरी पदयात्रा के समय चाहे सुबोध कुमार का नाम कटा हो मतदाता सूची से, चाहे रिंकू देवी का इसे पब्लिक डोमेन में वीडियो कांग्रेस पार्टी के द्वारा डाला गया, वो भी तत्काल परीक्षण पश्चात असत्य एवं झूठा साबित हुआ और काउंटर वीडियो आ गया ।फिर एक बात तय है यह  मुद्दा सिर्फ उन मतदाताओं के लिए हो सकता है जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है । इसके लिए आपके जो कार्यकर्ता हैं वह अगर कड़ी मेहनत ईमानदारी से  करें तो वह नाम सूची में आ सकता है । लेकिन यह मुद्दा जिनके नाम वोटर लिस्ट की सूची में हैं उनको थोड़ा बहुत भी आकर्षित नहीं करता है  ।अमूमन जनमानस की समस्या महंगाई, बेरोजगारी, आवास सीधे सरल शब्दों में कहूं तो रोटी कपड़ा और मकान रहता है । फिर आता है राष्ट्र स्वाभिमान जिसे वो अपने को दिल से  जोड़ता है । ऑपरेशन  सिंदूर की सफलता पर देश के अवाम को थोड़ा भी संदेह नहीं है। उसे मालूम है कि हमारी सेना ने वह काम कर दिया है जो देश के लिए मान शान और स्वाभिमान की बात है । तिरंगे को झुकने नहीं दिया गया है ।

आपको देश में गैर बराबरी आर्थिक क्षेत्र में सामाजिक क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र में  निजि क्षेत्र जो जनता के लिए यातना है ।जब तक वह मुद्दा नहीं उठाएंगे देश के मतदाता आपसे जुड़ेंगे इसमें संदेह है । टाइम पास मुद्दा न हो

आपको यकीनन ये मुद्दा नीरस लगता होगा  ।ग्लैमर नही है और इसमे  आपके कार्यकर्ता इसमें ईमानदारी से मेहनत नहीं करते हैं  ।लेकिन यह सच है देश मे जो मजदूर किसान, महिला, युवा, जवान, शोषित, दलित ,आदिवासी, गरीब के हित की लड़ाई लडेगा सत्ता उसकी होगी। उस वर्ग को पता है उनका रहनुमा कौन है ।

लाख कहं दू

आसमां हूं मै

जमीं हूं मै

पर

उसे तो खबर है

कुछ भी नहीं हू मै

दीपक पाण्डेय

गैर राजनीतिक विश्लेषक ,बिलासपुर

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