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Chhattisgarh

कल कांग्रेस के मंच पर, आज भाजपा के पद पर — भाजयुमो नियुक्ति ने खड़े किए असहज सवाल.. अंदर आक्रोश

चुनावी समर्थन कांग्रेस का, जिम्मेदारी भाजपा में — नियुक्ति बनी चर्चा का केंद्र

मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर… (पृथ्वी लाल केसरी)
राजनीति में दल बदल कोई नई घटना नहीं है, लेकिन जब यह बदलाव बिना किसी सार्वजनिक घोषणा, वैचारिक स्पष्टता या संगठनात्मक संवाद के सीधे जिम्मेदार पद में तब्दील हो जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। भाजपा युवा मोर्चा जिला एमसीबी की नवगठित कार्यकारिणी में की गई एक नियुक्ति इन दिनों इसी वजह से चर्चा का विषय बनी हुई है।

भाजयुमो जिला एमसीबी की हाल ही में घोषित कार्यकारिणी में ग्राम कोड़ा निवासी राजनाथ को जिला सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। यह नियुक्ति इसलिए असहज मानी जा रही है क्योंकि राजनाथ का हालिया राजनीतिक इतिहास भाजपा से नहीं, बल्कि कांग्रेस के सक्रिय समर्थन से जुड़ा रहा है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों और चुनावी गतिविधियों के आधार पर यह तथ्य सामने आया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान राजनाथ ने मध्यप्रदेश के कोतमा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व विधायक सुनील सराफ के पक्ष में प्रचार किया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी वे कांग्रेस प्रत्याशी विनय जायसवाल के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाते देखे गए थे। यह राजनीतिक गतिविधियां बहुत पुरानी नहीं हैं, बल्कि हालिया चुनावों से जुड़ी हुई हैं।

प्रश्न उठ रहा है कि जो व्यक्ति हाल तक कांग्रेस के लिए प्रचार करता रहा हो, वह भाजपा युवा मोर्चा में सीधे जिला स्तर का पदाधिकारी कैसे बना। क्या संगठन को उनके राजनीतिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी, या फिर यह जानकारी होने के बावजूद नजरअंदाज कर दी गई। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या भाजपा संगठन को अपने उन कार्यकर्ताओं की कमी पड़ गई है, जो वर्षों से पार्टी के साथ जुड़े रहे हैं और जमीन पर काम करते आए हैं।

नियुक्ति को लेकर भाजपा के भीतर ही असंतोष की चर्चा है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना उभर रही है कि इस तरह के फैसले पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता और कार्यकर्ताओं के मनोबल दोनों को प्रभावित करते हैं। उनका कहना है कि जब निष्ठा और संघर्ष की जगह अचानक आए लोगों को जिम्मेदार पद मिलते हैं, तो समर्पित कार्यकर्ताओं के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी हो जाती है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक पद तक सीमित नहीं है। यह उस भरोसे से जुड़ा है, जिस पर कोई भी संगठन खड़ा होता है। पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि नेतृत्व को ऐसी नियुक्तियों पर स्पष्ट और पारदर्शी रुख अपनाना होगा।

अब सबकी निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं कि क्या इस नियुक्ति की समीक्षा की जाएगी, क्या संगठन की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाएगी, या फिर यह मामला भी समय के साथ दबा दिया जाएगा। भाजपा के लिए यह सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठनात्मक विश्वसनीयता की एक अहम परीक्षा बन चुका है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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