शिक्षकों को क्यों ज्यादा याद आ रहे डिप्टी सीएम अरुण साव और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी… ? मोदी की गारंटी को लेकर शिक्षक फेडरेशन का हल्ला बोल

सूरजपुर(मनीष जायसवाल) ।छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रांतीय आह्वान पर बुधवार को प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में मोदी की गारंटी को लेकर हल्ला बोल कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सहायक शिक्षक एवं समग्र शिक्षक संवर्ग ने अपनी चार सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन कर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।
फेडरेशन ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित मोदी की गारंटी के तहत सहायक शिक्षकों की वर्षो से लंबित समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए था, लेकिन अब तक ठोस पहल नहीं होने से शिक्षकों में भारी आक्रोश है। इसी के चलते प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत सभी जिलों में एक साथ प्रदर्शन किया गया।
सूरजपुर जिला मुख्यालय में जिला प्रशासन द्वारा नया बस स्टैंड स्थल पर धरना-प्रदर्शन की अनुमति दी गई, जहां सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण एवं अनुशासित रहा। धरना स्थल पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि मोदी की गारंटी वास्तव में सुशासन का प्रतीक है, तो बेरोजगारों, शिक्षकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बार-बार सड़क पर उतरने की नौबत क्यों आ रही है। वक्ताओं ने कहा कि सहायक शिक्षकों की ताकत को कम आंकना सरकार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान उपमुख्यमंत्री अरुण साव तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी शिक्षकों के बीच चर्चा में रहे। इस दौरान शिक्षकों ने चुनाव से पूर्व उनके द्वारा किए गए वादों तथा धरना स्थल पर दिए गए समर्थन के आश्वासन की याद दिलाई और लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की अपेक्षा जताई।
एक शिक्षक वक्ता ने कहा कि चुनाव के समय घोषणाएं कर दी जाती हैं, लेकिन जब तक उनके लिए संगठित संघर्ष नहीं किया जाता, तब तक मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को जो भी अधिकार और लाभ मिले हैं, वे आंदोलन और संघर्ष के माध्यम से ही प्राप्त हुए हैं।
वक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन केवल सहायक शिक्षकों का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय का है। प्रधान पाठक एवं अन्य संवर्ग के शिक्षक भी आंदोलन में समान रूप से शामिल हैं और आपसी एकता से ही मांगों को पूरा कराया जा सकता है।
चार सूत्रीय प्रमुख मांगें
1. मोदी की गारंटी के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति को तत्काल दूर किया जाए।
2. पूर्व सेवा गणना करते हुए समस्त सहायक/समग्र शिक्षकों को क्रमोन्नति वेतनमान प्रदान किया जाए।
3. शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य किए जाने के निर्णय को वापस लिया जाए।
4. VSK/वीएसके ऐप को शिक्षकों के निजी मोबाइल में अनिवार्य रूप से उपयोग कराने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए फेडरेशन के सूरजपुर जिला अध्यक्ष विजय साहू ने कहा कि सहायक शिक्षक लंबे समय से शासन-प्रशासन की उपेक्षा का शिकार रहे हैं। यदि शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
महिला मोर्चा से माधुरी तिर्की ने कहा कि निजी मोबाइल में ऐप के माध्यम से अटेंडेंस कराना शासन की गलत नीति है। इससे शिक्षकों के पर्सनल डेटा के दुरुपयोग और फ्रॉड की संभावना बनी रहती है। शासन को स्वयं डिवाइस उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक अटेंडेंस के विरोध में नहीं हैं, बल्कि निजी मोबाइल से ऐप के उपयोग के विरोध में हैं।
आंदोलन में प्रमुख रूप से जिला अध्यक्ष श्री विजय साहू सचिव,शशि भूषण दुबे, नान्हु राजवाड़े, महिला मोर्चा से माधुरी तिर्की, सुनीता सिंह, जिला पदाधिकारी देव चंद पंडो, चंद्रिका सिंह आयाम, बहादुर खान, महेंद्र राजवाड़े, देवेंद्र पाण्डेय, सच्च्चिदा नन्द दुबे, पुष्प राज पांडेय, बृृजेश तिवारी, रवि पांडेय, राम प्रकाश विश्व कर्मा, ईश्वर दयाल वैश्य, त्रिभुवन सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष गण नवल किशोर गुप्ता, ओंकार सिंह, लव कुमार सिंह प्रकाश चंद सिंह, प्रवीण श्रीवास्तव , वीरेंद्र भगत, महेश प्रजापती, शांतनु पांडेय, राम लल्लू साहू, डी सी सोरी, देव नाथ सिंह, विवेक पैकरा, बाबू लाल राजवाड़े, अनिता सिंह, दिनेश्वरी पैकरा, भजन राजवाड़े, राज मोहन राजवाड़े, अमोल सिंह, बनारसी सिंह, उज्ज्वल सिंह, बसंत सिंह, सूर्य भान सिंह, शोभा सिंह, रामकली कुजुर्, मोनिका गुप्ता, विनीता सिंह, कलिस्ता सिंह, तारा चंद चौबे, पुष्पेंद्र दुबे, राकेश पांडेय, राय सिंह, सत्य नारायण सिंह, चिंतामणी सिंह, विश्वनाथ सिंह, अशोक मिंज, महिपाल सिंह, अशोक सिंह, महादेव सिंह, राज कुमार बुध राम सिंह, व अन्य सेकडों शिक्षक/ शिक्षिका उपस्थित होकर आंदोलन में शामिल हुए।





