महिला आरक्षण नहीं, हक का पूरा नक्शा चाहिए” — मधु गुप्ता ने जातीय जनगणना को बताया असली कुंजी
850 सीटें, तब मिलेगा न्याय?” महिला आरक्षण पर कांग्रेस नेता का बड़ा बयान

रामानुजगंज: महिला आरक्षण विधेयक पर राजनीतिक बहस के बीच ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मधु गुप्ता ने स्पष्ट रुख रखा है। उनका कहना है कि केवल आरक्षण की घोषणा पर्याप्त नहीं, बल्कि वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जातिगत जनगणना अनिवार्य है।
मधु गुप्ता ने कहा कि देश में महिला आरक्षण की अवधारणा कांग्रेस शासनकाल में सामने आई थी, लेकिन समय के साथ इसे लागू करने की प्रक्रिया जटिल होती गई। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक समाज के विभिन्न वर्गों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आएगी, तब तक आरक्षण का लाभ संतुलित तरीके से नहीं पहुंच सकता।
उन्होंने 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना जरूरी होगा। उनका तर्क है कि यदि सीटों को बढ़ाकर लगभग 850 किया जाता है और इसके लिए परिसीमन आयोग गठित किया जाता है, तभी सभी वर्गों—खासकर महिलाओं और पिछड़े समुदायों—को समुचित प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
गुप्ता ने यह भी कहा कि पुराने आंकड़ों के आधार पर नई व्यवस्था लागू करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार जातिगत जनगणना से क्यों बच रही है, जबकि यही प्रक्रिया समाज की वास्तविक संरचना को सामने लाएगी।
ओबीसी वर्ग को लेकर उन्होंने विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि यह वर्ग बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन नीति निर्माण में इसकी हिस्सेदारी स्पष्ट नहीं है। “जब तक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक हक की बात अधूरी रहेगी,” उन्होंने कहा।
गुप्ता ने आरोप लगाया कि वर्तमान विधेयक में ओबीसी वर्ग की हिस्सेदारी स्पष्ट किए बिना आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है, जो लंबे समय में प्रतिनिधित्व के सवाल को और जटिल बना सकती है।





