UGC का नया कानून, कॉलेजों में तनाव की चेतावनी — स्वर्ण समाज ने घेरा कलेक्टर कार्यालय
शिक्षा के नाम पर विभाजन? UGC समता अधिनियम के विरोध में स्वर्ण समाज का आर-पार संघर्ष

बिलासपुर …UGC अधिनियम के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ आज सर्वस्व स्वर्ण समाज सड़कों पर उतर आया। पहले रैली निकाली गई, फिर कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर साफ संदेश दिया गया कि यह कानून वापस नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा। प्रदर्शन के दौरान अधिनियम को खुलकर “काला कानून” बताया गया।
राजनीति पीछे, शिक्षा और संविधान आगे
कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता, समाज के वरिष्ठ, शिक्षाविद और प्रबुद्धजन एक मंच पर नजर आए। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि यह संघर्ष किसी दल का नहीं, बल्कि संविधान, शिक्षा और छात्रों के भविष्य का है।
31 बिंदुओं में सीधा आरोप
स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति के नाम 31-बिंदुओं का ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि UGC द्वारा जारी अधिसूचना समानता के संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करती है और सामान्य वर्ग के छात्रों को कानूनी सुरक्षा से बाहर कर देती है।
सामान्य वर्ग की खुली अनदेखी
वक्ताओं ने कहा कि अधिनियम में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी तक सीमित किया गया है। इससे सामान्य वर्ग के छात्र किसी भी संरक्षण के दायरे में नहीं आते, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
इक्विटी कमेटी पर तीखा सवाल
अनिवार्य इक्विटी कमेटी को लेकर कहा गया कि संतुलित प्रतिनिधित्व के बिना यह व्यवस्था न्याय का मंच नहीं, बल्कि एकतरफा दबाव का माध्यम बन सकती है। इससे छात्रों को अपनी बात रखने के अधिकार से वंचित किया जाएगा।
शैक्षणिक परिसरों में तनाव की आशंका
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यह अधिनियम विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सौहार्दपूर्ण वातावरण को नुकसान पहुंचाएगा। जातिगत आधार पर अविश्वास बढ़ेगा और शैक्षणिक संस्थान टकराव के केंद्र बन सकते हैं।
स्वायत्तता और गुणवत्ता पर सीधा वार
कहा गया कि नए प्रावधानों के चलते संस्थान अपने पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और अकादमिक निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं ले पाएंगे। अनावश्यक नियम, जांच और प्रक्रियाएं शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेंगी।
शिक्षक और छात्र दोनों दबाव में
नए नियमों से शिक्षकों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ेगा। शिक्षण और शोध की जगह कागजी औपचारिकताओं में समय जाएगा, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई, नवाचार और करियर अवसरों पर पड़ेगा।
आर्थिक बोझ और केंद्रीकरण का खतरा
स्वर्ण समाज का कहना है कि अधिनियम से संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा। संसाधन शिक्षा और शोध की बजाय नियमों के पालन में खर्च होंगे और उच्च शिक्षा का केंद्रीकरण बढ़ेगा।
तीन सूत्री मांग, सरकार को अंतिम संदेश
प्रदर्शन के अंत में स्वर्ण समाज की ओर से सरकार को तीन स्पष्ट संदेश दिए गए। पहला, UGC समता अधिनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। दूसरा, अधिनियम की संवैधानिक वैधता और इसके व्यावहारिक दुष्प्रभावों की उच्च स्तरीय समीक्षा कराई जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले दूरगामी असर सामने आ सकें। तीसरा, राष्ट्रपति देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सीधे हस्तक्षेप करें और इस अधिनियम को निरस्त करें।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस कानून को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा। राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, प्रदेश के शिक्षा मंत्री, केंद्रीय मंत्री टोकन साहू, स्थानीय विधायक अमर अग्रवाल, UGC समिति और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी भेजी गई है।





