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शातिर चोर पकड़ाया…. बिना नंबर की बाइक में हेलमेट पहनकर कैसे चोरी करने निकलता था, पुलिस को बताई दिलचस्प दास्तान

सूरजपुर।जिला पुलिस ने एक बार फिर बड़ी लकीर खींच कर शातीर अंतराज्जीय चोर गिरोह के मुख्य आरोपी एवं चोरी के सोने-चांदी के जेवर खरीदने वाले ज्वेलरी संचालक गिरफ्तार किया है। पुलिस की पकड़ में  आने के बाद शातिर चोर ने कई राज उगले हैं। दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि चोरी करने के लिए वह जिस बाइक का इस्तेमाल करता था,उससे नंबर प्लेट ही हटा देता था और खुद हेलमेट पहनकर निकलता था ।

यह पूरी क्राइम स्टोरी कुछ ऐसी है कि 9 जुलाई 2025 की दोपहर सूरजपुर जिले के थाना भटगांव के जरही शक्तिनगर के मोहल्ले में रहने वाले प्रशांत पांडेय अपने परिवार के सहित कही गए थे। जब वे घर लौटे तो उनके होश उड़ गए..। दरवाजे का ताला टूटा हुआ था, आलमारी अस्त-व्यस्त पड़ी थी और सोने-चांदी के जेवरों के साथ 35 हज़ार रुपए नकद भी गायब थे..। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे तक तोड़ दिए गए थे। यह किसी सामान्य चोर का काम नहीं था, बल्कि ऐसे गिरोह का, जो पेशेवर अंदाज़ में वारदातों को अंजाम देता है..।

शिकायत दर्ज होते ही थाना भटगांव की पुलिस अलर्ट हो गई। सूरजपुर के एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने इस मामले को चुनौती मानते हुए एक विशेष टीम बनाई..। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संतोष महतो और डीएसपी अनूप एक्का कर रहे थे..! इसके बाद शुरू हुई असली जासूसी फिल्म जैसी कार्रवाई से हुई..। भटगांव से लेकर अनूपपुर तक 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। कई दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को टोल नाका कोतमा के पास एक सुराग मिला..। फुटेज में तीन संदिग्ध नज़र आए और उनमें से एक की पहचान शहडोल के कुख्यात चोर शिवा सिंह नेताम के रूप में हुई..!

16 सितंबर की शाम को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि शिवा सिंह अपने साथियों के साथ कंचनपुर के दावत रेस्टोरेंट के पास मौजूद है..। जैसे ही खबर मिली, पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर दी और कुछ ही मिनटों में उसे दबोच लिया गया..।

आरोपी शिवा के गिरफ्तारी होते ही राज़ का पिटारा खुल गया। उनसे पूछताछ में बताया कि वह 2018 से लगातार चोरी कर रहा है। पूछताछ में यह बात सामने आई कि उसका तरीका बेहद शातिर था..!वह जिस मोटर साइकिल से चोरी करता था उस से नंबर प्लेट हटा देता और हेलमेट पहनता और चेहरे को कपड़े से ढांक कर रखता ताकि उसकी पहचान नहीं हो पाए।

शातिर चोर शिवा दिन में 11 बजे से 4 बजे के बीच कॉलोनियों में घूमकर बंद घरों की रेकी करता था। और मौका मिलते ही पीछे का दरवाजा कटर और सब्बल से तोड़कर जेवर और नकदी चुरा कर भाग जाता चोरी अब उसकी आदत बन गई थी।

पूछताछ में शिवा ने एक और राज़ खोला। उसने कबूल किया कि अक्टूबर 2024 में भी उसने अपने साथियों के साथ भटगांव SECL कॉलोनी के मकान नंबर C-17 में सेंध लगाई थी..। वहां से उसने 50 हज़ार नकद और सोने-चांदी के जेवर चोरी किए थे। उस मामले की रिपोर्ट पहले से दर्ज थी और जांच अधूरी थी। यानी पुलिस को एक ही गिरफ्तारी में दो पुराने मामलों का सुराग मिल गया …!

अब जिले की पुलिस के सामने सवाल था कि शिवा जो चोरी करता है उसका माल आखिर जाता कहां था..? इस पर शिवा ने बताया कि सोने-चांदी के जेवर वह पाली के दीप ज्वेलर्स में बेच देता था। ज्वेलरी संचालक रामचरित्र सोनी इन जेवरों को पिघलाकर खपाता था। पुलिस ने रामचरित्र सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया।

जप्ती में पुलिस ने करीब 3 लाख रुपए मूल्य का सामान बरामद किया। इसमें 13.02 ग्राम सोना, 668 ग्राम चांदी के जेवर, एक अपाचे मोटरसाइकिल, कटर मशीन, लोहे का सब्बल, हेलमेट और पिट्ठू बैग शामिल थे। चोरी की रकम और जेवर आपस में बांटने की बात भी शिवा ने स्वीकारी।

जांच में सामने आया कि शिवा सिंह और उसका गिरोह कालरी कर्मचारियों को विशेष रूप में टारगेट किया हुआ था। वह केवल सूरजपुर ही नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के शहडोल, अनूपपुर, अमलाई, चचाई और छत्तीसगढ़ के कोरबा तक फैला हुआ था। इन पर पहले से ही दर्जनों मामले दर्ज हैं और कई थानों ने इनके खिलाफ स्थायी वारंट जारी किए हैं। यह गिरोह संगठित होकर बेहद शातिराना तरीके से अपराध करता था और पुलिस को चकमा देने के लिए बार-बार ठिकाना बदलता रहता था।

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी भटगांव सरफराज फिरदौसी, प्रधान आरक्षक सुशील मिश्रा, आरक्षक दिनेश ठाकुर, रजनीश सिंह, राधेश्याम साहू, श्याम सिंह, रोशन सिंह और युवराज यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अब गिरोह के अन्य चार फरार सदस्यों की तलाश में जुटी है।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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