बेटा डूबा नहीं… मारा गया है—बिलासपुर में रो पड़ा छपरा का पिता, मौत की गुत्थी और उलझी
विश्वविद्यालय में मौत, पिता का आरोप—“सच दबाया गया… मेरे बेटे को इंसाफ दो

बिलासपुर… बिलासपुर में फिर पहुंचकर बिहार छपरा निवासी अरशद अयूब ने अपने 19 वर्षीय बेटे अर्सलान अंसारी की संदिग्ध मौत पर न्याय की मांग उठाई। अर्सलान की मौत 21 अक्टूबर 2025 को गुरु घासीदास विश्वविद्यालय परिसर के तालाब के पास पाई गई थी। प्रारंभिक तौर पर इसे डूबने का मामला बताया गया, लेकिन पिता अरशद शुरुआत से ही इसे हत्या मानते हुए लगातार जांच की मांग कर रहे हैं।
टूटा हुआ पिता न्याय मांग रहा है
अरशद अयूब ने पत्रकारों से कहा कि वह किसी औपचारिक प्रेस वार्ता के लिए नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता के रूप में आए हैं, जिसका बेटा रहस्यमयी परिस्थितियों में मारा गया और जिसके सवालों का कोई जवाब नहीं दे रहा।
उन्होंने कहा कि वह कई महीनों से बिहार से बिलासपुर के बीच चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब भी उनके हाथ सच नहीं लगा है।
मेरे बेटे की मौत डूबने से नहीं, चोट लगने से हुई
अरशद अयूब ने कहा कि पुलिस ने अब तक उन्हें आधिकारिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी है। उन्होंने कहा—
“मुझे जो जानकारी मिली है, उसमें साफ बताया गया है कि मेरे बेटे की मौत पानी में डूबने से नहीं, बल्कि चोट से हुई है। फिर भी पुलिस मुझे रिपोर्ट देने से बच रही है।
अरशद ने आरोप लगाया कि कोनी पुलिस सिर्फ यह कहती है कि रिपोर्ट आ चुकी है, लेकिन “उच्च अधिकारियों के निर्देश पर” ही उसे दिया जाएगा।
मोबाइल बंद, कपड़े अलग-अलग जगह
अरशद ने दस्तावेजों में कई गंभीर तथ्य दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि 24 अक्टूबर की सुबह उनका बेटे का मोबाइल बंद मिला। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने उन्हें बताया कि अर्सलान का खुद का फोन बंद मिल रहा था और उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। उन्होंने बताया —मेरे बेटे की टी-शर्ट अलग मिली, बैग अलग, लोअर अलग। यह किसी साधारण घटना जैसा नहीं दिखता।
विश्वविद्यालय ने जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की
अरशद के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना के बाद अत्यधिक जल्दबाजी दिखाई और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया। उन्होंने कहा—अगर यह दुर्घटना थी तो सच क्यों नहीं बताया गया? मेरे बेटे के साथ आखिरी बार कौन था? उसके साथ क्या हुआ?
उनका कहना है कि CUET परीक्षा देने आए बाहरी राज्यों के छात्रों की सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय की चिंताजनक लापरवाही सामने आती है।
एसपी से मिलने आया…बताऊंगा दुख
अरशद ने कहा कि वह अब सीधे पुलिस अधीक्षक बिलासपुर से मिलकर बेटे की मौत की वास्तविक वजह जानने की मांग करेंगे।
उन्होंने कहा—
“अगर मेरे बेटे को चोट लगी थी तो जिम्मेदारी किसकी है? और अगर डूबने की बात सच है तो रिपोर्ट मुझे क्यों नहीं दी जा रही?”
मौत का सच चाहता है… क्या यह भी मुश्किल है?
अरशद अयूब की आंखों में दुख और निराशा साफ झलकती है। उन्होंने कहा कि वह कानून पर भरोसा रखते हैं, लेकिन जवाबों की अनुपस्थिति उनकी पीड़ा को और गहरा कर रही है।
यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं—विश्वविद्यालय सुरक्षा पर गंभीर सवाल है। अर्सलान की मौत की गुत्ती और उसके पिता के आरोपों ने विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब पूरा मामला उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।





