बेलतरा की सियासत पर ‘सुपारी’ का साया: सुपारी किलिंग में आया मंडल अध्यक्ष का नाम, विधायक पर अंकित का सीधा सवाल.. क्या यही है पार्टी विद डिफरेंस
ज्वेलर्स हमले से खुली साजिश की परतें, 25 लाख में हत्या की डील का दावा

बिलासपुर/बेलतरा… बेलतरा विधानसभा की राजनीति पर गंभीर आरोपों की परछाईं गहरा गई है। राजकिशोर नगर वसंत विहार स्थित ज्वेलर्स संचालक पर हुए प्राणघातक हमले और लूटकांड की जांच ने एक बड़े राजनीतिक नाम को घेरे में ला खड़ा किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह केवल लूट तक सीमित नहीं था, बल्कि शहर के चर्चित सब्जी कारोबारी और भाजपा पार्षद बंधु मौर्य की कथित सुपारी किलिंग की साजिश भी रची गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने बिलासा गुड़ी में पत्रकार वार्ता के दौरान खुलासा किया कि आरोपियों ने 25 लाख रुपये में हत्या की सुपारी लेने की बात स्वीकार की। इसमें 6 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए गए। जांच में भारतीय जनता पार्टी के बेलतरा पूर्वी मंडल अध्यक्ष राजू सोनकर का नाम सामने आया है, जिन्हें बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का करीबी माना जाता है।
“अपराध पर चुप्पी क्यों?” — अंकित गौरहा
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति पर सवाल है। उन्होंने पूछा कि जब सत्ताधारी दल का मंडल अध्यक्ष ही हत्या की सुपारी देने जैसे गंभीर आरोपों में घिरा हो, तब नेतृत्व की चुप्पी क्यों है? सवाल उठता है क्या यही भारतीय जनता पार्टी का चाल चरित चेहरा है।
गौरहा ने कहा कि बेलतरा विधानसभा की छवि धूमिल हुई है। व्यापारी समुदाय में भय का माहौल है और आम नागरिक असमंजस में हैं। यदि पुलिस ने खुलासा किया है, तो पार्टी नेतृत्व तुरंत स्पष्ट रुख क्यों नहीं लेता?
विधायक से सीधा सवाल
अंकित गौरहा ने सीधे तौर पर विधायक सुशांत शुक्ला से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति किस आधार पर हुई? क्या पार्टी ने पृष्ठभूमि की जांच की थी? यदि आरोप गंभीर हैं तो संगठन कार्रवाई क्यों नहीं करता?
गौरहा ने यह भी कहा कि यदि मामले को दबाने की कोशिश हुई है, तो इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। जमीन, डकैती और हत्या की साजिश जैसे मामलों में सत्ता से जुड़े नाम सामने आना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। सच तो यह खबर सामने आने के बाद बाद बेलतरा विधानसभा की जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है।
जांच की दिशा और राजनीतिक असर
अंकित ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। बेलतरा की सियासत अब नैतिक जवाबदेही की कसौटी पर है। पार्टी विथ डिफरेंस का नारा लगाने वाले भाजपा नेताओं से। सवाल केवल आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही और पारदर्शिता का है।
बेलतरा की जनता ने विकास के नाम पर जनादेश दिया था। अब वही जनता जवाब चाहती है—क्या सत्ता से जुड़े नामों पर भी कानून समान रूप से लागू होगा, या राजनीतिक चुप्पी सच्चाई पर पर्दा डाले रखेगी? साथ ही भाजपा के नेताओं को बताना होगा की सुपारी देने वाले का नाम किसने आगे किया? और किसकी सिफारिश पर उसे मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।





