इंस्टाग्राम रील से खुला शिकार का राज: 9 दुर्लभ ‘विशाल गिलहरियों’ के हत्यारे तक ऐसे पहुंचा वन विभाग
दंतेवाड़ा से मुख्य आरोपी गिरफ्तार—घर से रीछ की खाल और फंदे बरामद

गरियाबंद-दंतेवाड़ा…जंगल में हुए शिकार का सच इस बार जमीन से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया से बाहर आया। एक इंस्टाग्राम रील ने ऐसा सुराग दिया कि वन विभाग की संयुक्त टीम सीधे आरोपी तक पहुंच गई। कार्रवाई में 9 दुर्लभ भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकार का खुलासा हुआ और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
मामला तब सामने आया जब ओडिशा वन विभाग के कर्मचारियों की नजर इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो पर पड़ी। वीडियो में दो लोग नौ भारतीय विशाल गिलहरियों के साथ नजर आ रहे थे। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है, जिसे सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है। वीडियो सामने आते ही मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू हुई।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग यूनिट, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वाड और दंतेवाड़ा वन मंडल ने मिलकर डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए आरोपियों की पहचान की। इंस्टाग्राम अकाउंट और अपलोड की गई रील्स के आधार पर लोकेशन ट्रेस की गई और 8 अप्रैल को दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र से मुख्य आरोपी बंशीराम कोवासी को गिरफ्तार कर लिया गया।
तलाशी के दौरान आरोपी के घर से स्लॉथ भालू की खाल और जानवरों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फंदे बरामद हुए। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि शिकार का उद्देश्य बुश मीट यानी जंगली मांस हासिल करना था।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में शामिल अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। इस पूरी कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस से मिली जानकारी भी अहम साबित हुई, जिससे जांच को दिशा मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय विशाल गिलहरी सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि जंगल के संतुलन की अहम कड़ी है। यह बीजों के प्रसार में मदद करती है और किसी भी क्षेत्र के पर्यावरण की स्थिति का संकेत देती है। ऐसे में इस प्रजाति का शिकार सीधे तौर पर जंगल के प्राकृतिक चक्र पर असर डालता है।
वन विभाग ने कार्रवाई को चेतावनी के रूप में पेश करते हुए साफ किया है कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।





