गांव के मैदान से उठा प्रीमियर लीग का शोर, मस्तूरी में खेल ने दिखाई नई ताकत
हरदादीह बना खेल राजधानी, एमपीएल ने बदली मस्तूरी की खेल तस्वीर

बिलासपुर….ग्राम पंचायत हरदादीह का खेल मैदान इन दिनों सिर्फ मुकाबलों का गवाह नहीं, बल्कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं के आत्मविश्वास का मंच बन गया है। तीन दिवसीय कबड्डी प्रतियोगिता और मस्तूरी प्रीमियर लीग एमपीएल ने पूरे इलाके में खेल को लेकर नई ऊर्जा भर दी है। गांव-कस्बों से आए खिलाड़ी और दर्शक, दोनों ही इस आयोजन को यादगार बना रहे हैं।
आईपीएल की तर्ज पर प्रीमियर लीग
मस्तूरी प्रीमियर लीग को आईपीएल की तर्ज पर आयोजित किया गया है, जहां पूरे विधानसभा क्षेत्र के खिलाड़ियों की नीलामी कर आठ अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। ऑक्शन की यह प्रक्रिया मस्तूरी क्षेत्र में पहली बार देखने को मिली, जिसने खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों में भी जबरदस्त उत्साह पैदा किया है। मुकाबलों को लेकर हर दिन मैदान में भीड़ बढ़ती जा रही है।
खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन मंच
इस अवसर पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश महामंत्री चंद्र प्रकाश सूर्या मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया और कहा कि इस तरह के आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। खेल न सिर्फ शारीरिक मजबूती देता है, बल्कि टीम भावना और अनुशासन भी सिखाता है, जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है।
जीवन से खेल का गहरा रिश्ता
कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत सभापति प्रतिनिधि खिलावन पटेल और हरदादीह के सरपंच मंगल राम सिदार ने कहा कि खेल हमेशा से ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे आयोजन गांव के युवाओं को सकारात्मक दिशा देते हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है।
बड़े स्तर पर खिलाड़ी ऑक्शन
स्थानीय नेताओं और आयोजकों ने बताया कि मस्तूरी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर खिलाड़ियों का ऑक्शन कर टीमें बनाई गई हैं। इससे खिलाड़ियों में पेशेवर सोच विकसित हो रही है और खेल के प्रति गंभीरता भी बढ़ी है। लीग प्रणाली के जरिए खेले जा रहे मुकाबलों ने पूरे आयोजन को अलग पहचान दी है।
कबड्डी मुकाबलों में दमखम
हरदादीह में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता में आसपास के गांवों से आई टीमों ने जोर आजमाइश की। मैदान में खिलाड़ियों का जोश और दर्शकों की तालियों ने माहौल को पूरी तरह खेलमय बना दिया। निर्णायकों ने निष्पक्ष तरीके से मुकाबलों का संचालन किया।
सामूहिक प्रयास बना खेल उत्सव
इस आयोजन को सफल बनाने में आयोजकों, स्थानीय प्रतिनिधियों और खेल प्रेमियों का सामूहिक योगदान रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि मस्तूरी में खेल अब सिर्फ शौक नहीं, बल्कि पहचान बनता जा रहा है।





