सिस्टम सो रहा.. धड़ल्ले से बिक रहा मौत का सामान.. हादसों की बाढ़
कानून कागज़ों में, शहर में चाइनीज मांझा का आतंक

रायपुर..छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। पंडरी एक्सप्रेस-वे पर स्कूल जा रही बहन को छोड़ने निकले युवक संकल्प द्विवेदी गंभीर हादसे का शिकार हो गए। तेज धार वाले मांझे ने उनके दोनों गाल चीर दिए, जिससे उन्हें आपातकालीन रूप से अस्पताल में भर्ती कर 34 टांके लगाने पड़े। डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर बताते हुए प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत बताई है।
घटना उस समय हुई, जब संकल्प बाइक से अपनी बहन को स्कूल छोड़ने जा रहे थे। अचानक सड़क पर फैले चाइनीज मांझे की धार सीधे उनके चेहरे से टकरा गई। हादसे में संकल्प के चेहरे पर गहरे जख्म आए, जबकि उनकी बहन के हाथ में भी हल्की चोट आई। संकल्प का कहना है कि एक पल में सब कुछ बदल गया और अब उन्हें लंबे इलाज और मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ेगा।
यह घटना एक बार फिर नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। राजधानी में चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद बाजारों में यह खुलेआम बिक रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल पतंगबाजी के मौसम में ऐसे हादसे सामने आते हैं, लेकिन कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रह जाती है।
कुछ दिन पहले ब्राह्मण पारा वार्ड में भी एक महिला चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल हुई थीं। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद सख्ती न दिखना निगम की लापरवाही को उजागर करता है।
पीड़ित संकल्प द्विवेदी ने न्याय की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से मुलाकात की। तिवारी ने इस घटना को नगर निगम की घोर लापरवाही बताते हुए कहा कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की बिक्री या तो प्रशासन की नाकामी है या फिर मिलीभगत का संकेत। उन्होंने निगम आयुक्त और कलेक्टर को पत्र लिखकर दोषी दुकानदारों पर आपराधिक कार्रवाई और पूरे नेटवर्क की सघन जांच की मांग की है।
घटना के बाद नगर निगम अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। अब शहरवासियों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस बार चाइनीज मांझे पर वास्तव में लगाम लगेगी, या फिर कोई और चेहरा इस जानलेवा डोर का शिकार बनेगा।





