“लक्ष्य साफ था, इसलिए रास्ता खुद बनता गया” — प्रथम प्रयास में ही बन गई सिविल जज.. स्वाति पैंकरा ने साझा किए सफलता के सूत्र
आरक्षक की बेटी बनी जज: पहले ही प्रयास में फतह, मेहनत ने लिखी नई

बिलासपुर… विशेष शाखा में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक सतलोक साय पैंकरा की पुत्री कु. स्वाति पैंकरा ने सिविल जज (व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी) परीक्षा-2024 में पहले ही प्रयास में चयनित होकर एक प्रेरक मिसाल कायम की है। सामान्य वर्ग में मिली यह सफलता केवल एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि अनुशासन, स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर साधना की कहानी है।
स्वाति ने डी.पी. विप्र लॉ कॉलेज से बीएएलएलबी की पढ़ाई पूरी करते ही सिविल जज बनने का लक्ष्य तय कर लिया था। पढ़ाई के साथ उन्होंने उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ प्रैक्टिस शुरू की, ताकि कानून की बारीक समझ विकसित हो सके। उन्होंने नए और पुराने कानूनों का गहन अध्ययन किया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के महत्वपूर्ण सिटेशन पढ़े और प्रतिदिन 15 से 16 घंटे तक तैयारी को समर्पित किए।
सीजी वालों से बातचीत में स्वाति ने बताया कि उन्हें पेपर अच्छा होने का विश्वास था, लेकिन परिणाम की चिंता से दूर रहकर उन्होंने केवल मेहनत पर ध्यान केंद्रित किया। परिणाम आया तो परिवार के लिए वह क्षण गर्व और भावुकता से भरा रहा।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता मनप्यारी देवी, पिता सतलोक साय पैंकरा और विशेष शाखा के पूरे स्टाफ को दिया। खास तौर पर विशेष शाखा प्रमुख दीपमाला कश्यप के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए स्वाति ने कहा कि इंटरव्यू की तैयारी के दौरान उनका मार्गदर्शन निर्णायक साबित हुआ। मॉक इंटरव्यू, व्यक्तित्व प्रस्तुति और उत्तरों की संरचना को लेकर मिले सुझावों ने आत्मविश्वास को मजबूत किया और अंतिम चरण में बढ़त दिलाई।
स्वाति का कहना है कि पारिवारिक पृष्ठभूमि कभी बाधा नहीं बनती, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो। एक आरक्षक चालक की बेटी का जज बनना इस बात का प्रमाण है कि सपनों की ऊंचाई पद से नहीं, प्रयास से तय होती है।





