SECL में ‘कट मनी’ का खेल बेनकाब! वीडियो वायरल होते ही कर्मचारियों का ट्रांसफर, अफसरों पर खामोशी क्यों?
SECL में ‘रेट कार्ड’ का खेल! वीडियो वायरल, सवाल—सिस्टम में कौन असली खिलाड़ी?

बैकुंठपुर…(पृथ्वी लाल केसरी) साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड की चरचा कॉलरी का कोल हैंडलिंग प्लांट इन दिनों एक वायरल वीडियो के कारण सुर्खियों में है, लेकिन इस बार सुर्खियां काम या उत्पादन की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की हैं जिसमें ड्यूटी और ओवरटाइम तक ‘पैसे’ से तय होने के आरोप सामने आ रहे हैं। 9 अप्रैल को सामने आए इस वीडियो ने भीतर चल रहे उस खेल की परतें खोल दीं, जिसकी चर्चा अब तक सिर्फ फुसफुसाहट में होती थी।
वीडियो में दो श्रमिकों के बीच हो रही बातचीत साफ-साफ सुनाई देती है। बातचीत में संडे ड्यूटी दिलाने, ओवरटाइम लगाने और यहां तक कि बिना काम हाजिरी दर्ज कराने के एवज में तय रकम की बात सामने आती है। आवाजों में कोई झिझक नहीं दिखती, जैसे यह कोई अपवाद नहीं बल्कि सामान्य व्यवस्था हो। यहीं से सवाल उठता है कि अगर यह बातचीत सहज है, तो क्या यह सिस्टम भी उतना ही सामान्य हो चुका है?
वीडियो सामने आते ही प्रबंधन की सक्रियता भी उतनी ही तेज दिखी, लेकिन कार्रवाई की दिशा ने नए सवाल खड़े कर दिए। महज कुछ घंटों के भीतर दोनों कर्मचारियों का ट्रांसफर आदेश जारी हो गया। आदेश में कारण प्रशासनिक बताया गया, लेकिन न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई प्रारंभिक जांच की जानकारी सामने आई। सबसे अहम यह कि जिन अधिकारियों पर इस कथित वसूली के आरोप बातचीत में सामने आ रहे हैं, उनसे अब तक कोई पूछताछ नहीं हुई।
कॉलरी क्षेत्र में अब चर्चा सिर्फ वीडियो की नहीं, बल्कि उस ‘रेट सिस्टम’ की हो रही है, जिसकी झलक वीडियो में मिली। बताया जा रहा है कि संडे ड्यूटी, जो दो दिन के वेतन के बराबर मानी जाती है, उसके लिए अलग से पैसे लिए जाते हैं। ओवरटाइम के नाम पर हर महीने तय रकम वसूली जाती है और बिना काम हाजिरी तक का खेल चलता है। यह सब अगर सही है, तो सवाल सिर्फ एक प्लांट का नहीं, पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर उठता है।
मामले को और गंभीर बनाते हैं महिला कर्मचारियों के आरोप। कुछ महिला श्रमिकों ने अभद्र व्यवहार और दबाव बनाकर पैसे लेने की शिकायतें सामने रखी हैं। इससे यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कार्यस्थल की गरिमा और सुरक्षा से भी जुड़ जाता है।
अब स्थानीय कर्मचारी और प्रभावित पक्ष सीधे प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं। मांग साफ है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच हो, जिन नामों का जिक्र सामने आया है उनकी जिम्मेदारी तय हो और पूरे सिस्टम की परत दर परत जांच की जाए।
वीडियो ने जो दिखाया, वह एक झलक हो सकती है, लेकिन कार्रवाई ने जो दिखाया, उसने बहस को और गहरा कर दिया है। सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ दो कर्मचारियों तक सीमित मामला है या फिर उस बड़े तंत्र की कहानी, जहां सच सामने आने पर सबसे पहले आवाज उठाने वाले ही हटा दिए जाते हैं।





