जेल की सलाखों के पीछे विचाराधीन कैदी की मौत…मचा हड़कंप… सोया रहा जिला प्रशासन..?
हिरासत में मौत: स्वास्थ्य प्रोटोकॉल और निरीक्षण व्यवस्था कटघरे में”

रामानुजगंज..( पृथ्वीलाल केशरी).. जिला जेल में हत्या के आरोप में बंद 42 वर्षीय विचाराधीन कैदी विष्णु कुमरिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने जेल प्रशासन और जिला व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक पस्ता थाना क्षेत्र के ग्राम सीतारामपुर पाट में 15 नवंबर 2023 को हुए हत्या प्रकरण में आरोपी था।
बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में मौत
शुक्रवार शाम कैदी ने पेट दर्द और दस्त की शिकायत की। उसे उपचार के लिए 100 बिस्तर अस्पताल, रामानुजगंज में भर्ती कराया गया। शाम लगभग 6 बजे से रात 9 बजे तक चिकित्सकीय निगरानी के बाद उसे फिर जिला जेल लौटाया गया।
शनिवार सुबह करीब 9:45 बजे उसकी तबीयत दोबारा बिगड़ी। जेल प्रशासन ने तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां सुबह लगभग 10 बजे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. शरद चंद्र गुप्ता ने आवश्यक परीक्षण के बाद मृत्यु की पुष्टि की।
जेलर वाल्मीकि ध्रुव ने बताया कि कैदी को लगातार पेट संबंधी समस्या थी और हालत बिगड़ते ही अस्पताल भेजा गया।
सवालों के घेरे में निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था
घटना के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कैदी की तबीयत शुक्रवार शाम से ही गंभीर थी, तो उसे तीन घंटे उपचार के बाद वापस जेल क्यों भेजा गया? क्या जेल में पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी उपलब्ध थी?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जिला जेल का नियमित और प्रभावी निरीक्षण लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। जेल मैन्युअल के अनुसार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर निरीक्षण करना चाहिए। लेकिन इस संबंध में हाल के महीनों में किसी सघन निरीक्षण या विस्तृत रिपोर्ट की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
जिला प्रशासन की जवाबदेही तय होगी?
एक विचाराधीन कैदी की मौत केवल जेल प्रशासन तक सीमित मामला नहीं है। यह जिला प्रशासन की समग्र निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है। ऐसी सूरत में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन हुआ?
क्या मेडिकल रिव्यू या रेफरल की प्रक्रिया पर्याप्त थी?
क्या वरिष्ठ अधिकारियों ने जेल का औचक निरीक्षण किया? बहरहाल सवालों के स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।
घटना की सूचना परिजनों और वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मौत की न्यायिक जांच कराता है या इसे सामान्य चिकित्सकीय प्रकरण मानकर फाइल बंद कर देता है।
रामानुजगंज जिला जेल की यह घटना केवल एक मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की परतें खोलने वाला मामला बन सकती है।





